जानिए.....क्यों चढ़ाते है गणेशजी को मोदक का भोग

Apr 22 2015 12:34 AM

लेकिन आप को पता है क्या कि भगवान श्रीगणेश को मोदक ही प्रिय क्यों है और क्यों खासकर बुधवार के दिन मोदक का भोग लगाने का खास महत्व है? जानिए...आप को बता दे कि हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार इस कलियुग में गणेश जी के धूम्रकेतु रूप की पूजा की जाती है। जिनकी दो भुजाएं हैं। लेकिन मनोकामना सिद्धि के लिये बड़ी आस्था से भगवान गणेश का चार भुजाधारी स्वरूप पूजनीय है। 

जिनमें से एक हाथ में अंकुश, दूसरे हाथ में पाश, तीसरे हाथ में मोदक व चौथे में आशीर्वाद है। आमतौर पर श्रीगणेश के हाथों में मोदक या लड्डू होने की वजह उनका पसंदीता व्यंजन होना ही माना जाता है। जबकि धर्म दर्शन इसमें प्रतीक रूप में जीवन से संदेश व गूढ़ रहस्य उजागर करता है। 

वैसे मोदक का अर्थ बताया गया है जो मोद (आनन्द) देता है, जिससे आनन्द प्राप्त हो, संतोष हो, इसके अर्थ में गहराई यह है तन का आहार हो या मन के विचार वह सात्विक और शुद्ध होना जरूरी है। तभी आप जीवन का वास्तविक आनंद पा सकते हैं, दरअसल, धर्म व आध्यात्मिक नजरिए से मोदक ज्ञान का प्रतीक भी है। 

जैसे मोदक को थोड़ा-थोड़ा और धीरे-धीरे खाने पर उसका स्वाद और मिठास अधिक आनंद देती है और अंत में मोदक खत्म होने पर आप तृप्त हो जाते हैं, उसी तरह वैसे ही ऊपरी और बाहरी ज्ञान व्यक्ति को आनंद नही देता परंतु ज्ञान की गहराई में सुख और सफलता की मिठास छुपी होती है। इस तरह जो अपने कर्म के फलरूपी मोदक भगवान के हाथ में रख देता है उसे प्रभु आशीर्वाद देते हैं। 

यही श्रीगणेश के हाथ में मोदक होने और उनके प्रिय भी होने के पीछे का संदेश है। बुधवार का दिन गणेश जी का दिन होता है। इस दिन बुद्धि के देवता गणेशजी की मोदक का भोग लगाकर पूजा प्रखर बुद्धि व संकल्प के साथ सुख-सफलता व शांति आप पा सकते है।