केदारनाथ हादसा - रोंगटे खड़े कर देने वाला खौफनाक मंज़र

शिव का साक्षात्कार करने लोग बम-बम भोले, जय शिव के जयकारे लगाते हुए उत्तराखंड की वादियों में पहुंचे। इन वादियों में छाया सुकून ओर प्राकृति सौंदर्य कब उन्हें अपनी ओर खींच लेगा खुद उन्हें ही नहीं पता था लेकिन यह सुकून मातम में भी बदल सकता है, इस बात का अंदाज़ा शायद वहां वर्षों से रहने वालों को तक नहीं था। अचानक पहाड़ों से उतरती जलधाराओं ने जैसे सबकुछ लील लिया हो।

पानी के बहाव के साथ चट्टानों के ढहने की आवाज़ और लोगों का मचाता शोर - गुल और अगले ही पल पसरा मातमी सन्नाटा। जी हां, वर्ष 2013 के जून माह में बाबा केदारनाथ के दर्शन करने वालों को इस बात का पता भी नहीं होगा कि यह यात्रा उनके जीवन के अंतिम सफर के तौर पर बदल जाएगी।

पानी में बहते लोग खुद को बचाने के लिए तरह - तरह के जतन करते रहे कुछ ने पेड़ों की टहनियां पकड़ ली तो कुछ ने चट्टानों पर सेफ एरिया ढूंढा लेकिन जब पेड़ ही गिरकर बहने लगे और चट्टानें धंसने लगी तो उन्हें उनकी सांसे खत्म होते हुए लगीं ऐसे में उन्हें बस भगवान से आस थी।

हर कोई कह रहा था बचा ले भगवान, बस बचा ले। कुछ लोग भाग्यशाली थे जो हादसे की भयावहता के बाद भी किसी तरह बच निकलने में कामयाब हुए। वे आज भी हादसे को याद कर रूआंसे हो जाते हैं, उनके बोल सुनकर यही लगता है जैसे बाबा केदार ने अपनी जटा से मां गंगा को एकाएक मुक्त कर दिया और धरती पर जलप्लावन की स्थिति बन गई।

&

कुछ तो ऐसे भी थे जिन्हें अपनों के मिलने की आस लगी हुई थी, ये आस है कि आज भी नहीं छूटती। हादसे को याद करते हुए वे अपने प्रिय जन की तस्वीर को अपने दोनों हाथों में भर लेते हैं और बड़ी खामोशी के साथ आंसू की बूंद टप से प्रियजन की तस्वीर पर पड़ जाती है। वे ईश्वर से यही आस करते हैं कि उनका खोया हुआ प्रियजन जहां भी हो जल्द घर लौट आए।

- Sponsored Advert -

Most Popular

- Sponsored Advert -