क्या आप जानते हैं आखिर क्यों जीवनभर कुँवारी रहीं थीं माँ नर्मदा

Feb 12 2019 06:24 PM
क्या आप जानते हैं आखिर क्यों जीवनभर कुँवारी रहीं थीं माँ नर्मदा

आप सभी को बता दें कि आज नर्मदा जयंती है. ऐसे में नर्मदा नदी जीवनभर कुँवारी रहीं हैं और इसके पीछे कुछ कथाएं हैं जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं. आइए जानते हैं.

पौराणिक कथा - नर्मदा और शोण भद्र की शादी होने वाली थी. विवाह मंडप में बैठने से ठीक एन वक्त पर नर्मदा को पता चला कि शोण भद्र की दिलचस्पी उसकी दासी जुहिला(यह आदिवासी नदी मंडला के पास बहती है) में अधिक है. प्रतिष्ठत कुल की नर्मदा यह अपमान सहन ना कर सकी और मंडप छोड़कर उलटी दिशा में चली गई. शोण भद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह भी नर्मदा के पीछे भागा यह गुहार लगाते हुए' लौट आओ नर्मदा'... लेकिन नर्मदा को नहीं लौटना था सो वह नहीं लौटी. अब आप कथा का भौगोलिक सत्य देखिए कि सचमुच नर्मदा भारतीय प्रायद्वीप की दो प्रमुख नदियों गंगा और गोदावरी से विपरीत दिशा में बहती है यानी पूर्व से पश्चिम की ओर.

कहते हैं आज भी नर्मदा एक बिंदू विशेष से शोण भद्र से अलग होती दिखाई पड़ती है. कथा की फलश्रुति यह भी है कि नर्मदा को इसीलिए चिरकुंवारी नदी कहा गया है और ग्रहों के किसी विशेष मेल पर स्वयं गंगा नदी भी यहां स्नान करने आती है. इस नदी को गंगा से भी पवित्र माना गया है.मत्स्यपुराण में नर्मदा की महिमा इस तरह वर्णित है -‘कनखल क्षेत्र में गंगा पवित्र है और कुरुक्षेत्र में सरस्वती. परन्तु गांव हो चाहे वन, नर्मदा सर्वत्र पवित्र है. यमुना का जल एक सप्ताह में, सरस्वती का तीन दिन में, गंगाजल उसी दिन और नर्मदा का जल उसी क्षण पवित्र कर देता है.’ एक अन्य प्राचीन ग्रन्थ में सप्त सरिताओं का गुणगान इस तरह है. गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती. नर्मदा सिन्धु कावेरी जलेSस्मिन सन्निधिं कुरु..

कथा 2 : इस कथा में नर्मदा को रेवा नदी और शोणभद्र को सोनभद्र के नाम से जाना गया है. नद यानी नदी का पुरुष रूप. (ब्रह्मपुत्र भी नदी नहीं 'नद' ही कहा जाता है.) बहरहाल यह कथा बताती है कि राजकुमारी नर्मदा राजा मेखल की पुत्री थी. राजा मेखल ने अपनी अत्यंत रूपसी पुत्री के लिए यह तय किया कि जो राजकुमार गुलबकावली के दुर्लभ पुष्प उनकी पुत्री के लिए लाएगा वे अपनी पुत्री का विवाह उसी के साथ संपन्न करेंगे. राजकुमार सोनभद्र गुलबकावली के फूल ले आए अत: उनसे राजकुमारी नर्मदा का विवाह तय हुआ. नर्मदा अब तक सोनभद्र के दर्शन ना कर सकी थी लेकिन उसके रूप, यौवन और पराक्रम की कथाएं सुनकर मन ही मन वह भी उसे चाहने लगी. विवाह होने में कुछ दिन शेष थे लेकिन नर्मदा से रहा ना गया उसने अपनी दासी जुहिला के हाथों प्रेम संदेश भेजने की सोची. जुहिला को सुझी ठिठोली. उसने राजकुमारी से उसके वस्त्राभूषण मांगे और चल पड़ी राजकुमार से मिलने. सोनभद्र के पास पहुंची तो राजकुमार सोनभद्र उसे ही नर्मदा समझने की भूल कर बैठा. जुहिला की नियत में भी खोट आ गया.

राजकुमार के प्रणय-निवेदन को वह ठुकरा ना सकी. इधर नर्मदा का सब्र का बांध टूटने लगा. दासी जुहिला के आने में देरी हुई तो वह स्वयं चल पड़ी सोनभद्र से मिलने. वहां पहुंचने पर सोनभद्र और जुहिला को साथ देखकर वह अपमान की भीषण आग में जल उठीं. तुरंत वहां से उल्टी दिशा में चल पड़ी फिर कभी ना लौटने के लिए. सोनभद्र अपनी गलती पर पछताता रहा लेकिन स्वाभिमान और विद्रोह की प्रतीक बनी नर्मदा पलट कर नहीं आई.अब इस कथा का भौगोलिक सत्य देखिए कि जैसिंहनगर के ग्राम बरहा के निकट जुहिला (इस नदी को दुषित नदी माना जाता है, पवित्र नदियों में इसे शामिल नहीं किया जाता) का सोनभद्र नद से वाम-पार्श्व में दशरथ घाट पर संगम होता है और कथा में रूठी राजकुमारी नर्मदा कुंवारी और अकेली उल्टी दिशा में बहती दिखाई देती है. रानी और दासी के राजवस्त्र बदलने की कथा इलाहाबाद के पूर्वी भाग में आज भी प्रचलित है.

यहाँ जानिए रथ आरोग्य सप्तमी से जुडी दो पौराणिक कथाएं

एक अप्सरा ने दिया था भगवान राम को सीता माता से अलग होने का श्राप

विनायकी चतुर्थी पर जरूर पढ़े उनसे जुडी यह पौराणिक कथा

Live Election Result Click here here for more

General Election BJP INC
545 343 96
Orrissa BJD BJP+
147 103 27
Andhra Pradesh YSRCP TDP
175 144 30
Arunachal Pradesh BJP+NPP OTHER
60 19 5
Sikkim SDF SKM
32 5 5