व्रद्धों की सेवा से होता हे कल्याण

Oct 06 2015 11:51 PM
व्रद्धों की सेवा से होता हे कल्याण

आज यह युवा पीढ़ी जाने कहाँ जा रही है लोग खुद मे इतने व्यस्त हे की उन्हे अपने इस कर्तव्य का जरा सा भी ध्यान नहीं हे जबकि उनका सबसे बड़ा कर्म हे की अपने मता पिता तथा अपने बुजुर्गो की सेवा करना। कुछ लोग हर समय अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ गलत व्यवहार करते हे वे ये नहीं जानते की उन्हे भी इस उम्र का सामना करना पड़ेगा।

अपने बच्चों की वजह से कुछ लोग वृद्धाश्राम का सहारा लेते है जो की हमारे लिए बड़े ही दुख की बात हे की जिस माँ बाप ने हमे जन्म दिया हमारे लिए जाने कितना कुछ किया खुद भूके रहे पर हमे खिलाया हमारी रक्षा के लिए जाने कितने जप तप किये आज वही माँ बाप हमसे दुखी हे यह बहुत गलत हे सबसे बड़ा अधर्म है ।

यदि ये हमसे दुखी हे तो हमें इन्हे खुश रखना चाहिये रोटी के मोहताज उन मां-बापों को दर दर क्यों भटकना पड़े जिस मां-बाप ने पढ़ाया-लिखाया हमारी हर एक जरूरत को पूरा किया हमने जो चाहा जो मागा हमें दिया पर आज हम उन्ही माता पिता के साथ गलत करते हे उनकी सेवा से कतराते हे यह एक बहुत बड़ा पाप है ।

हम अपने जीवन मे कितने भी धर्म कर्म करें पर यदि अपने माता पिता का तिरिष्कार कर रहे हे तो हमारे सारे धर्म कर्म व्यर्थ हे जीवन भर जप तप किया बहुत पूजा पाठ की लेकिन माँ बाप को सुख नहीं दिया वे दुखी हे उनकी सेवा न की उनका हमेशा अपमान किया तो इस सब पूजा पाठ का कोई अस्तित्व नहीं ।

हमें अपने माँ बाप को हमेशा खुश रखना चाहिये हर किसी के माँ बाप अपने बच्चों के प्रति प्रेम व निष्ठा रखते हे वे हमेश भगवान से उनके उज्वल भविष्य की कामना करते है हमें भी अपने माँ बाप एवं ब्रद्धों की सेवा करनी चाहिये। यह हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य होता हे हमें भी इस समय से गुजरना पड़ेगा तथा हम जैसा करेगें वेशा फल पायेगें हम इन ब्रद्ध जनों की सेवा करके अपने जीवन को महान व जीवन भर सुख सम्व्रधी प्राप्त कर सकते है।