बेटी से है संसार,ना करो बेटी का तिरस्कार

Oct 23 2015 03:20 PM
बेटी से है संसार,ना करो बेटी का तिरस्कार

एक दिन की बात है, एक लड़की की माँ ने खूब परेशान होकर अपने पति को बोला की हमारा समय बहुत ख़राब चल रहा हे, एक वक़्त का खाना पूरा नहीं होता और बेटी साँप की तरह बड़ी होती जा रही है

इतनी गरीबी की हालत में इसकी शादी कैसे करेंगे ? 

बाप भी विचार में पड़ गया दोनों ने दिल पर पत्थर रख कर एक फैसला किया की कल बेटी को मार कर गाड़ देंगे।

दुसरे दिन का सूरज निकला, माँ ने लड़की को खूब लाड प्यार किया, अच्छे से नहलाया तैयार किया और बार-बार उसका सर चूमने लगी .

यह सब देख कर लड़की बोली : माँ मुझे अपने से कही दूर भेज रहे हो क्या ?

वरना आज तक आपने मुझे कभी भी ऐसे कभी प्यार नहीं किया, माँ केवल चुप रही और रोने लगी, तभी उसका बाप हाथ में फावड़ा और चाकू लेकर आया ।

माँ ने लड़की को सीने से लगाकर, बाप के साथ रवाना कर दिया ।

रास्ते में चलते-चलते बाप के पैर में कांटा चुभ गया , बाप एक दम से निचे बैठ गया, बेटी से देखा नहीं गया उसने तुरंत कांटा निकालकर फटी चुनरी का एक हिस्सा बाप के पैर पर बांध दिया .

बाप बेटी दोनों एक जंगल में पहुँचे वहां बाप हाथ में फावड़ा लेकर एक गड्ढा खोदने लगा वहीँ सामने बैठी बेटी ये सब देख रही थी, थोड़ी देर बाद गर्मी के कारण 

बाप को पसीना आने लगा बेटी बाप के पास गयी और पसीना पोछने के लिए अपनी चुनरी दी, बाप ने धक्का देकर बोला तू जा यहाँ से दूर जाकर बैठ जा।

थोड़ी देर बाद जब बाप गड्ढा खोदते-खोदते थक गया , बेटी दूर से बैठे -बैठे देख रही थी, जब उसको लगा की पिताजी शायद थक गये हैं तो पास आकर बोली पिताजी आप थक गये है, लाओ ये फावड़ा मुझे दे दो ये गड्ढा में खोद देती हूँ आप थोडा आराम कर लो, मुझसे आप की यह तकलीफ देखी नहीं जाती .

यह सुनकर बाप ने अपनी बेटी को गले लगा लिया, उसकी आँखों में आंसू की नदिया बहने लगी, उसका दिल पसीज

गया , 

बाप बोला : बेटी मुझे माफ़ कर दे, यह गड्ढा तो में तेरे लिए ही खोद रहा था, और तू ही मेरी इतनी चिंता करती है, अब जो होगा सो होगा तू हमेशा मेरे कलेजा का टुकड़ा बन कर रहेगी में खूब मेहनत करूँगा और तेरी शादी धूम धाम से करूँगा -

सारांश : बेटी तो भगवान की अनमोल भेंट है , इसलिए कहते हे बेटा भाग्य से मिलता हे और बेटी सौभाग्य से ।।

और ये सौभाग्य हर किसी के नसीब में नहीं होता.

बेटी हे तो कल हे बेटी नहीं तो कल नहीं ।।।