चांदी की पालकी में सवार हो निकले राजाधिराज श्री महाकाल

कहा जाता है कि सृष्टि के कण कण में भगवान शिव का वास है। मगर भगवान शिव की आराधना के लिए कुछ नगर खास माने जाते हैं। इन नगरों में से एक शहर है श्री महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन। भगवान शिव अर्थात् श्री महाकालेश्वर को यहां राजाधिराज कहा जाता है। विभिन्न अवसर पर भगवान श्री महाकालेश्वर प्रजा के बीच दर्शन देने पहुंचते हैं। भगवान श्री महाकालेश्वर अपनी चांदी की पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं।

उज्जैन में श्रावण, भाद्रपद, विजयादशमी और  कार्तिक - अगहन मास में बाबा श्री महाकालेश्वर चांदी की पालकी में सवार होकर निकलते हैं। ऐसे में आज भी बाबा श्री महाकालेश्वर लाव - लश्कर के साथ चांदी की पालकी में सवार होकर भक्तों का हाल जानने निकल ते है। भगवान श्री महाकालेश्वर की पालकी के साथ उन्हें पुलिस अश्वारोही दल, सशस्त्र बल द्वारा गार्ड आॅफ आॅनर दिया गया। बाबा की पालकी जैसे ही मंदिर परिसर के बाहर आई श्रद्धलुओं के हाथ जुड़ गए और हर कहीं जय श्री महाकाल के जयकारे गूंजे।

इस दौरान कड़ाबीन के धमाके भी गूंजने लगे। यही नहीं सवारी में भजन मंडलियां झांझ मंजीरे बजाते हुए शामिल हुईं। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा श्री महाकालेश्वर के दर्शन किए। पालकी श्री महाकालेश्वर मंदिर से होते हुए शिप्रा तट पहुंची। रामघाट पर पूजन और श्री महाकालेश्वर का अभिषेक हुआ और फिर पालकी श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची। जहां श्रद्धालु बाबा की पालकी के दर्शन और ज्योर्तिलिंग श्री महाकालेश्वर के दर्शन पाकर अभिभूत हो उठे। 

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