सेवा हमारी जमानत है

ोस्तों, दिल से की गयी सेवा ही...प्रार्थना...अरदास...और...इबादत है,
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जीव...चाहे मनुष्य हो...या...जानवर...इनकी की गयी सेवा...अमानत है,
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ईश्वर के सामने...जब...खुलेगा...हमारा...गुनाहों का खाता,
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तब...यही...की गयी सेवा...हमारी...जमानत है,

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