ब्रह्मज्ञान प्राप्त करना मतलब भगवान मिल जाना

हर मानव के अंदर देश दुनिया से संबन्धित कुछ न कुछ ज्ञान तो होता है। पर अध्यात्मिक ज्ञान हर किसी के पास नहीं होता है। क्योंकि हम उसे पाने का प्रयास ही नहीं करते है। ब्रह्म ज्ञान होना एक बहुत बड़ी शक्ति होती है। जिसमे आत्मा और परमात्मा का मिलन होता है। व्यक्ति शांत भाव से अपने अंदर परमात्मा के दर्शन कर लेता है। मानव में क्रांति’ और ‘विश्व में शांति’ केवल ‘ब्रह्मज्ञान’ के द्वारा ही संभव है।

हर व्यक्ति की आत्मा पवित्र होती है आत्मा का कोई दोष नहीं होता दोष तो हमारे मन के गलत विचारों का है आत्मा दिव्य होती है। कहा जाए तो दुष्ट से दुष्ट व्यक्ति की भी आत्मा पवित्र होती है। खोट तो उसके मन के विचारों में है। ब्रह्म ज्ञान एक ऐसा ज्ञान जिसमे व्यक्ति इस संसार से विरक्त होकर भगवान में लीन हो जाता है वह कहता है। की हे प्रभु जो भी हें आप मेरे है। वह इस संसार को मिथ्या समझ लेता है। इसी के चलते कबीर दास जी ने कहा है....

कबिरा यह जग कुछ नहीं खिन खारा खिन मीठ। 
कल जो देखे मंडपे आज मसाने डीथ ।। 

इसका अर्थ है की यह संसार क्षण भंगुर है कभी अच्छा तो कभी बुरा प्रतीत होता है। क्योंकि जिसे हमने कल दूल्हे के रूप में मंडप पे देखा था। आज वही शमसान पर शव के रूप मे दिखाई दे रहा है। ब्रह्म ज्ञानि इस संसार को मिथ्या समझता है। वह भगवान में लीन रहता है।

ब्रह्म ज्ञान का परिचय बाहरी साधनों से सम्भव नहीं है। केवल ‘ब्रह्मज्ञान’ की प्रदीप्त अग्नि ही व्यक्ति के हर पहलू को प्रकाशित कर सकती है। यही नहीं बल्कि व्यक्ति के नीचे गिरने की प्रवृति को ‘ब्रह्मज्ञान’ की सहायता लेकर ऊँचे उठने की दिशा में मोड़ा जा सकता है। ब्रह्म ज्ञान से वह एक योग्य व्यक्ति और सच्चा नागरिक बन सकता है।

‘ब्रह्मज्ञान’ की प्राप्ति के बाद व्यक्ति साधना करे तो उसकी सांसारिक जिम्मेदारियां दिव्य कर्मों में बदल सकती हैं। आपके जीवन से अंधकार दूर हो सकता है सुख दुख की कोई चाह ही नहीं होती क्या सुख क्या दुख वह हर पल शांति के साथ व्यतीत करता है उसके  विचारों में सकारात्मक सोच आती है मन के भाव अच्छे तथा जीवन में दिव्यता आती है ब्रह्म ज्ञान से व्यक्ति का जीवन बदल जाता है उसे अपने कर्तव्य व कर्मों के लिये सही मार्ग दर्शन मिलता है। अच्छे और सकारात्मक गुणों का प्रभाव आपके अन्दर बढने लगता है | जीवन की समस्याएँ, उलझनें ,सुख- दुख, मान- सम्मान का कोई जिक्र ही नहीं रह जाता है। वह सरलता व शांति के साथ अपने कर्तव्य की और अग्रसर रहता है।

व्यक्ति अपने जीवन में उन्नत यानि समत्व, संतुलन और शांति की दिशा में उत्तरोत्तर बढता जाता है। यही ‘ब्रह्मज्ञान’ से प्राप्त होता है, यदि हमें अपने जीवन की वास्तविकता को जानना है तो ब्रह्मज्ञान का होना जरूरी है इसके लिये हमें सच्चे सदगुरू की शरण में जाना होगा। वे आपके जीवन की सत्यता व सद मार्क का दर्शन कराएगें ब्रह्मज्ञान हमें ब्रह्मधाम तक ले जा सकता है। जहाँ मुक्ति और आनन्द का साम्राज्य है।

 

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