शुभ फल देता है रवि पुष्य नक्षत्र

ज्योतिष गणनाओं पर आधारित विज्ञान है। जो कि ग्रहों और नक्षत्रों के गणनांक पर अपना फल प्रदान करता है। इस शास्त्र में करीब 27 नक्षत्र माने जाते हैं। इनमें 8 वे स्थान पर पुष्य नक्षत्र होता है। जब यह गुरूवार को होता है तो इसे गुरू पुष्य कहा जाता है और ऐसे ही जब यह रविवार को होता है तो इसे रवि पुष्य नक्षत्र कहा जाता है। इस नक्षत्र में खरीदी करना और कोई भी शुभकार्य करना बहुत ही अच्छा माना जाता है। माना जाता है कि इस नक्षत्र में खरीदी गई कोई भी वस्तु समृद्धि और सुख देती है। दरअसल मूल रूप में पुष्य नक्षत्र का स्वामी गुरू को कहा जाता है।

जब रवि पुष्य नक्षत्र होता है तो इस नक्षत्र में की गई खरीदी बेहद लाभकारी होती है। यदि इस नक्षत्र में विजय की कामना से कोई कार्य प्रारंभ किया जाए तो वह विजय दिलवाता है। यदि रवि पुष्य के दौरान सवार्थ सिद्धि योग आ जाए तो यह सोने पर सुहागा हो जाता है। इस समय में की गई खरीदी बेहद शुभ फल प्रदान करती है। इस तरह की खरीदी से साक्षात् लक्ष्मी घर में रहती हैं। यह मुहूर्त अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। इस मुहूर्त में मांगलिक कार्यों के लिए अच्छे योग की शुरूआत हो जाती है। इस मुहूर्त में किए गए हर काम सिद्ध होते हैं। 

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