रजिस्ट्री नियमों में बदलाव से हुई आसानी

नोएडा अथारिटी ने ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स से जुडे मामलों में भवन निर्माता और ग्राहकों के हित में अपनी नीति में बदलाव किया है.रजिस्ट्री के लिए सरल फार्मूला तैयार किया गया है.नोएडा अथारिटी के एसीईओ पीके अग्रवाल ने इस पर अंतिम मोहर लगाई

अग्रवाल ने कहा कि इस संशोधित नीति से उन हजारों लोगों को फायदा होगा जो सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी तकनीकी कारणों से रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे थे. नई पालिसी के तहत बिल्डर द्वारा अथारिटी को प्रोजेक्ट के बदले में दी गई कुल कीमत का दस फीसदी घटाने के बाद जो रकम बचेगी उतनी कीमत के फ्लेटों की रजिस्ट्री की अनुमति दी जाएगी.इस बारे में बिल्डर्स और बायर्स द्वारा यूपी सरकार और सीएम को आपत्ति दर्ज कराने के बाद यह फार्मूला निकाला गया.

एसीईओ पीके अग्रवाल ने बताया कि नई पॉलिसी के तहत किसी बिल्डर के प्रोजेक्ट में 500 फ्लेट हैं और अथारिटी के रिकार्ड में 200 करोड़ का भुगतान बनता है.यदि बिल्डर ने उसका 60 प्रतिशत यानी 120 करोड़ जमा कर दिया है तब अथारिटी 200 करोड़ का 10 प्रतिशत यानी 20 करोड़ कम करके आकलन करेगी.इस तरह 100 करोड़ तक की कीमत के फ्लेटों को कम्पलीशन रिपोर्ट दे देगी. इसके बाद उन फ्लेटों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ हो जाएगा.

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