न जाने क्या मासूमियत है

न जाने क्या मासूमियत है

न जाने क्या मासूमियत है

उसके चेहरे पर,

सामने आने से ज़्यादा

तुझे छुपकर देखना

अच्छा लगता है |

अाज फिर बढ गई

उसकी इज्जत मेरे दिल मे.

कहती थी

मुझे छोड देना पर

परिवार को नही|