माँ का त्याग

एक गरीब परिवार में एक सुन्दर सी बेटी ने जन्म लिया. बाप तो बहुत दुखी हो गया ओर सोचने लगा की काश बेटा पैदा होता तो कम से कम काम में तो हाथ बटाता, उसने अपनी बेटी को पाला जरूर, मगर दिल से नही.. वो पढने तो जाती थी पर ना ही स्कूल की फीस टाइम से जमा करता, और ना ही कापी किताबों पर ध्यान देता था, और अक्सर दारू पी कर घर में कोहराम मचाता था

उस लडकी की मॉ बहुत अच्छी व बहुत भोली भाली थी वो अपनी बेटी को बडे लाड प्यार से रखती थी. वो पति से छुपा-छुपा कर जैसे तैसे अपनी बेटी की फीस जमा करती और कापी किताबों का खर्चा देती थी. वो अपना पेट काट काट कर खुद फटे पुराने कपडे पहन कर गुजारा कर लेती, मगर वो अपनी बेटी का पूरा खयाल रखती थी. पति अक्सर घर से कई कई दिनों के लिये गायब हो जाता. जितना कमाता उतना दारू मे ही फूक देता था

वक्त का पहिया घूमता गया और बेटी धीरे-धीरे समझदार हो गयी. दसवीं क्लास में उसका दाखिला होना था. मॉ के पास इतने पैसै ना थे जो बेटी का स्कूल में दाखिला करा पाती. बेटी डरते डराते हुये पिता से बोली : पापा मैं ओर आगे पढना चाहती हूं मेरा हाईस्कूल में दाखिला करा दीजिए मम्मी के पास पैसै नही है. बेटी की बात सुनते ही बाप आग वबूला हो गया और जोर से चिल्लाने लगा बोला : तू कितनी भी पड लिख जाये तुझे करना तो चौका चूल्हा ही है क्या करेगी तू ज्यादा पड लिख कर, चल जा यहाँ से । 

उस दिन घर में उसने खूब आतंक मचाया व सबको मारा पीटा और बाद में खुद दारू पीकर सो गया । बाप का ये व्यवहार देखकर बेटी ने मन ही मन में सोच लिया कि अब वो आगे की पढाई नही करेगी. एक दिन उसकी मॉ बाजार गयी. तो बेटी ने पूछा: मॉ तुम कहॉ गयी थी. मॉ ने उसकी बात को अनसुना करते हुये कहा : बेटी कल मै तेरा हाई स्कूल में दाखिला कराउगी, बेटी ने कहा: नही़ं मॉ मै अब आगे नही पडूगी मेरी वजह से तुम्हे कितनी परेशानी उठानी पडती है पिताजी आये दिन तुमको मारते पीटते हैं ये कहते कहते वो रोने लगी

मॉ ने उसे सीने से लगाते हुये कहा: बेटी मै बाजार से कुछ रुपये लेकर आयी हूं मै कराउगी तेरा दखिला. बेटी ने मॉ की ओर देखते हुये पूछा: मॉ तुम इतने पैसै कहॉ से लायी हो ? मॉ ने उसकी बात को फिर से अनसुना कर दिया..... फिर वक्त वीतता गया..... "मॉ ने जी तोड मेहनत करके बेटी को जैसे तैसे करके पढाया लिखाया, बेटी ने भी मॉ की मेहनत को देखते हुये मन लगा कर दिन रात पढाई की और वह आगे बडती चली गयी ।

इधर बाप दिन रात दारू पी पी कर बीमार पड गया, डाक्टर के पास ले गये डाक्टर ने कहा इनको टी.बी. है और इनके गुर्दे भी ख़राब हो गए हे । और फिर एक दिन तबियत ज्यादा गम्भीर होने पर बेहोशी की हालत में एक अस्पताल में भर्ती कराया

दो दिन बाद जब उसे होश आया तो उसके पास खड़ी डाक्टरनी का चेहरा देखकर उसके होश उड गये ! ! क्योंकि वो डाक्टरनी कोई और नही वल्कि उसकी खुद की अपनी बेटी थी.. शर्म से पानी पानी बाप कपडे से अपना चेहरा छुपाने लगा और जोर जोर से रोने लगा हाथ जोडकर अपनी बेटी से बोला: बेटी मुझे माफ करना मैं तुझे समझ ना सका. बेटी आखिरकार हीरा होती है

बाप को रोते देखकर बेटी ने बाप को गले लगा लिया. दोस्तों गरीबी और अमीरी से कोई फर्क नहीं पडता, अगर इन्सान का इरादा हो तो आसमान में भी छेद हो सकता है 

किसी ने क्या खूब कहा हे 

"कौन कहता है कि आसमान मे छेद नही हो सकता, अरे एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों"$$$

एक दिन फिर बेटी माँ से बोली: माँ तुमने मुझे आज तक यह नहीं बताया कि मेरे हाईस्कूल के दाखिले के लिये तुम पैसै कहाँ से लायी थी ? बेटी के बार बार पूछने पर माँ ने जो बात बतायी उसे सुनकर बेटी की रूह काँप गयी.. उस माँ ने अपने शरीर का खून बेच कर बेटी का दाखिल कराया था

दोस्तों तभी तो मॉ को भगवान का दर्जा दिया गया है, शायद एक माँ ही हे जो अपनी औलाद के लिये जितना त्याग कर सकती है उतना दुनियाँ में कोई और नही कर सकता 

ओर अंत में दो पंक्तियाँ माँ के लिये 

गोदी में मुझको सुलाया है माँ ने, 

बडे प्यार से अपनी मीठी जुवॉ से,,

बेटा कह कर बुलाया है माँ ने, 

मुझको लेके अपनी नरम बाजुओं मे,,

मोहब्बत का झूला झुलाया है माँ ने, 

सभी जख्म अपने सीने पे लेके, 

हर चोट से बचाया है माँ ने,,

कभी मेरे माथे पे काला टीका लगा के,

यूं बचपन में मुझको सजाया है माँ ने,,

यूं चेहरा दिखा के मुझे रोज अपना,

मुझे मेरे रव से मिलाया है माँ ने,, 

ऐ इन्सॉ तू जो इतना इतरा के चलता है,

काबिल तुझे इसके बनाया है माँ ने,

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