क्या है शनि की साढ़ेसाती और इससे निवृति, जानें कुछ खास

Jan 22 2016 09:46 PM
क्या है शनि की साढ़ेसाती और इससे निवृति, जानें कुछ खास

अक्सर आपने भी देखा , सुना और शायद महसूस भी किया हो की गृह दशा को लेकर बहुत से लोग परेशान से रहते है उनके जीवन में कोई न कोई नई समस्या आ खड़ी होती है और इन्ही समस्याओं दे जूझते हुए उसका जीवन कुछ नीरस सा होने लगता है मन में प्रशन्नता ही नहीं रह जाती है मानव जीवन में इन ग्रहों का एक और अच्छा तो एक और बुरा भी प्रभाव पड़ता है इन्हीं नव ग्रहो में शनि एक रहस्यमयी ग्रह देवता हैं ,जो सूर्य के पुत्र है. शनि ग्रह को शनि देवता का प्रतीक रूप माना जाता है.

 इसलिए शनि की उपासना के लिए शनि ग्रह के पूजन का विधान है. आधुनिक विज्ञान के ज्ञान से लोगों के मन में बस यही प्रश्न उठता है की शनि ग्रह के पूजन से शनिदेव किस प्रकार प्रसन्न हो सकते हैं? लेकिन संपूर्ण दृश्य जगत चिन्मय है. और जड़ नाम का कोई तत्व विद्यमान नहीं है. देवता की प्रसन्नता के लिए प्रतीक का पूजन किया जा सकता है, जो फलदायी होता है. शनिदेव की कृपा के लिए शनि यंत्र के रूप में शनि ग्रह ब्रह्मांड में दृष्टिगोचर हैं. बताया जाता है .की शनि ग्रह की गति सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते अन्य ग्रहों की तुलना में बहुत कम है। इसलिए इन्हें शनैश्चर कहा गया है। शनि भगवान, शनिदेव भी इन्हें ही कहा जाता है.

भारतीय ज्योतिष के अनुसार सूर्य सहित नो ग्रह और बारह प्रकार के आकार में दिखने वाले तारा समूह हैं, जिन्हें राशियाँ कहा जाता है. इस प्रकार शनि ग्रह प्रत्येक राशि पर ढाई वर्ष व्यतीत करता है. ज्योतिष के अनुसार शनि अपनी धीमी चाल के कारण जिस राशि में रहता है उसके ढाई वर्ष , उसकी पूर्व की राशि के और ढाई पश्चात की राशि के ढाई वर्ष, इस प्रकार एक राशि पर कुल साढ़े सात वर्ष तक का प्रभाव डालता है.

इसे ही शनि की साढ़ेेसाती कहते हैं। शनि का प्रभाव भी उसकी राशि पर स्थिति के अनुसार वर्ष के क्रम में कठोर होता चला जाता है. शनि की साढ़ेेसाती से लोग भयभीत रहते हैं. यह आत्मावलोकन और कर्मों में सुधार का समय होना चाहिए. शनि देवता और शनि ग्रह लोक मानस में इतना रचे-बसे हैं कि जब-जब शनिदेव की बात चलती है तो वह शनि ग्रह पर केंद्रित होकर रह जाती है. शनिदेव का भय भी लोगों को बहुत सताता है. यह प्रबुद्धजनों को तय करना चाहिए कि देवता की कृपा चाहिए कि ग्रह की कुदृष्टि से बचना है. संतों की राय में तो कृपा की विनय से सारे काम बना करते हैं.