ख़ार ने सोने न दिया

ार को मैं ने मुझे यार ने सोने न दिया
रात भर तालि-ए-बेदार ने सोने न दिया
एक शब बुलबुल-ए-बेताब के जागे न नसीब
पहलू-ए-गुल में कभी ख़ार ने सोने न दिया

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