केजरीवाल ने माफी मांगी, गजेंद्र के परिजनों से मिले कई नेता

Apr 25 2015 12:52 AM

इस घटना ने दिल्ली पुलिस और केजरीवाल सरकार को आमने-सामने ला खड़ा किया है। गजेंद्र के परिवार ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। गजेंद्र के चाचा गोपाल सिंह ने सूत्रों से कहा, "हम चाहते हैं कि मामले की सीबीआई से और निष्पक्ष जांच हो। हमने यह बात राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र सिंह राठौर से भी कही है।" राठौर गजेंद्र के परिवार से मुलाकात करने के लिए दौसा जिले के नंगला झामरवाड़ा गांव पहुंचे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से उन्हें चार लाख रुपये का चेक सौंपा। 

परिवार ने मांग की है कि गजेंद्र सिंह की बेटी मेघा जो 12वीं में पढ़ रही है, उसे बोर्ड परीक्षा पास कर लेने के बाद जयपुर स्थित राजस्थान विश्वविद्यालय के महारानी कॉलेज में दाखिला दिया जाए। आप पर हो रहे चौतरफा हमलों के बीच केजरीवाल ने गजेंद्र के चाचा से फोन पर बात की और शोकाकुल परिवार को हर संभव मदद देने का वादा किया। वरिष्ठ आप नेता संजय सिंह इसी बीच गजेंद्र के पैतृक गांव पहुंचे और उनके परिजनों को पार्टी की ओर से 10 लाख रुपये का चेक सौंपा। 

संजय सिंह गजेंद्र के अंतिम संस्कार के एक दिन बाद वहां पहुंचे। गजेंद्र के परिजनों से मुलाकात के बाद संजय सिंह ने संवाददताओं से कहा कि उन्होंने दिल्ली सरकार से गजेंद्र के लिए शहीद का दर्जा और उसके परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की है। सिंह ने कहा, "मैं यह बात केजरीवाल तक पहुंचाऊंगा। मामले पर दिल्ली सरकार सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।" आप नेताओं और गजेंद्र के परिजनों के बीच यह पहली मुलाकात थी। 

उल्लेखनीय है कि घटना के बाद पिछले दो दिनों से गजेंद्र का परिवार आप नेताओं को कोस रहा था। उनका कहना था कि गजेंद्र की जान बचाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि गजेंद्र ने बुधवार को 4,000 लोगों के सामने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। घटना के समय मूकदर्शक बनी रही पुलिस ने कहा कि गजेंद्र एक सुसाइड नोट छोड़ गया है, लेकिन उसके परिजनों का कहना है कि लिखावट गजेंद्र की नहीं है। 

दिल्ली पुलिस ने अपना बचाव करते हुए आप के कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया है कि उन्होंने किसान को आत्महत्या के लिए उकसाया और उसकी सहायता करने के लिए पुलिस को आगे आने से रोका। दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आती है। उसने दिल्ली सरकार द्वारा मामले की दंडाधिकारी द्वारा कराई जाने वाली जांच में भी शामिल होने से मना कर दिया है। केजरीवाल ने स्वीकार किया कि हादसे के बाद उन्हें भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ अपना भाषण जारी नहीं रखना चाहिए था। 

उन्होंने हालांकि यह स्पष्ट किया कि वह एक घंटे का भाषण देने वाले थे, लेकिन 10-15 मिनट में ही खत्म कर दिया। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि वह मेरी गलती थी। संभवत: मुझे भाषण देना ही नहीं चाहिए था। अगर इससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो मैं माफी मांगता हूं।" उन्होंने कहा, "मैं दोषी हूं। मुझे दोषी ठहराइए। लेकिन हमें किसानों के मुख्य मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और राजनीति बंद करनी चाहिए।" केजरीवाल की इस माफी पर सभी राजनीतिक दलों ने उनकी आलोचना की है। 

भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "माफी काफी नहीं है। आप किसानों को अपने दफ्तर की सजावटी वस्तु और तमाशा नहीं बना सकते। आत्महत्या के मामले को नाटकीय नहीं बना सकते।" कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा, "दिल्ली के मुख्यमंत्री की ओर से आई सफाई नाकाफी है। जो कुछ भी उन्होंने किया वह नहीं होना चाहिए था।" बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने संसद के बाहर संवाददाताओं से कहा, "केजरीवाल से बस इतना कहना चाहती हूं कि माफी से किसान (गजेंद्र) वापस नहीं आएगा।" 

केजरीवाल ने कहा कि सच क्या है यह तो जांच के बाद ही सामने आएगा। इस घटना से भूमि अधिग्रहण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर किए जा रहे लगातार प्रहार की धार फिलहाल कुंद जरूर हो गई है। इसका सीधा फायदा केंद्र सरकार को मिलती दिख रही है। घटना के समय मूकदर्शक रही दिल्ली पुलिस को केंद्र से क्लीन चिट दे दिया जाना और आप के खिलाफ मामला दर्ज होना बड़े सियासी खेल की ओर इशारा है।