गुप्तचरों की यह कहानी जो है सदियों पुरानी

Jan 14 2016 08:45 PM
गुप्तचरों की यह कहानी जो है सदियों पुरानी

जासूस, जिसे हम गुप्तचर के नाम से भी जानते है। ये गुप्तचर आज नहीं सदियों से चले आ रहे है गुप्तचर का मतलब जिसे कोई न जाने और वे सभी के बारे में जान लें। आप जानते ही होगें की पौराणिक काल के शुरुआत से ही गुप्तचर मौजूद हैं। आज इस संसार की जितनी भी प्राचीन सभ्यताएं हैं उनमें गुप्तचरों का उल्लेख अवश्य रूप से मिलता है। ऋगवेद, अथर्ववेद, पुराण, मनु स्मृति और अर्थशास्त्र में गुप्तचरों का उल्लेख है। 

ऋग्वेद से मिले उल्लेख - 

सबसे प्राचीन ऋगवेद में गुप्तचरों की दाशता देखने को मिलती है ऋगवेद में जल के देवता वरुण को सहस्त्रनेत्र कहा गया है, यानी वरुण के सहस्त्रों गुप्तचर थे। गुप्तचर ही राजा के नेत्र होते थे। राजा को सारी जानकारी उन्हीं गुप्चारों से मिलती है. 

वेदों में गुप्तचारिणी का भी उल्लेख है जो दासियों से संबंधित सूचनाएं देने का कार्य करती थी। स्त्री गुप्तचरों की परंपरा वैदिक काल में ही आरंभ हो गई थी। ऋषियों की तपस्या भंग करने के लिए स्वर्ग से धरती पर आने वाली अप्सराएं गुप्तचर थीं।

श्री राम के गुप्तचर थे विद्वान -

रामायण में गुप्तचरी के दो उद्देश्य बतलाए गए हैं। पहला आत्मरक्षा और दूसरा राष्ट्र रक्षा। रामायण काल में अत्यंत उच्च कोटी की गुप्तचर व्यवस्था थी। राम और रावण की गुप्तचर व्यवस्था में भी बहुत अंतर था। जहां राम के गुप्तचर विद्वान और नीति का अनुसरण करते थे। वह मृदुभाषी व्यवहार वाले थे, वहीं रावण के गुप्तचर मायावी और धोखेबाज थे।

श्री कृष्ण के पौत्र के लिए गुप्तचर-

हरिवंश पुराण में 'बाणासुर प्रसंग' है जिसमें उल्लेख है कि जब अनिरुद्ध जब गुप्त रूप से बाणासुर की कन्या के महल में पहुंचे थे। तब बाणासुर के महल में श्री कृष्ण के गुप्तचर मौजूद थे। उषा-प्रद्युम्न के विवाह के बाद इन गुप्तचरों को वहां से वापिस बुला लिया गया था। 

मनु के 'रक्षाधिकृत' गुप्तचर-

मनु ने चर-व्यवस्था में 'रक्षाधिकृत' गुप्तचर (पुलिस) उल्लेख है। यह दो दो भागों में बांटा था। प्रथम अपराध अनुसंधान विभाग दूसरा सामान्य पुलिस विभाग। प्राचीन काल में अपराध अनुसंधान किस प्रकार किया जाता था इस संबंध में कई कथाएं मनु से संबंधित ग्रंथों में मिलती हैं।