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नेपाल में सराही गयी भारत द्वारा की गई मदद
नेपाल में सराही गयी भारत द्वारा की गई मदद

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा की नेपाल भूकंप त्रासदी में भारत की मदद को सराहा गया है. यूएनडीपी के सहायक प्रशासक मागडी मार्टनेज-सॉलीमैन ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं को नेपाल में भारत के योगदान के बारे में बताया, हमने भारती सैन्य बलों को सबसे पहले मदद पहुंचाते देखा. नेपाल का हवाईअड्डा भारतीय सैन्य विमानों, हेलीकॉप्टरों से भरा हुआ था, जो नेपाल के सैन्यबलों की मदद कर रहे थे और देश ने इस पहल का स्वागत किया है.

नेपाल दौरे से लौटे मार्टनेज ने वहां पुनर्निर्माण कार्यो के लिए अंतर्राष्ट्रीय कोष की कमी की भी बात कही. उन्होंने कहा, मानसून का मौसम करीब आ रहा है. इस तरह की ढीली प्रतिक्रिया से चिंता बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने सुधार कार्यक्रमों के लिए अगले तीन सालों में 17.5 करोड़ डॉलर का आग्रह किया था, लेकिन अभी तक सिर्फ एक करोड़ डॉलर ही प्राप्त हुए हैं.

मार्टनेज के मुताबिक, मीडिया के जरिए दिखाई जा रही तस्वीरों में शहरी क्षेत्रों में हुई तबाही को तवज्जो दी गई है, जबकि अधिक तबाही ग्रामीण क्षेत्रों में हुई है और 17.5 करोड़ डॉलर की सहायता राशि मुख्य रूप से ग्रामीण घरों के पुनर्निर्माण के लिए मांगी गई है. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के सभी राहत और पुनर्निर्माण प्रयासों के लिए संयुक्त राष्ट्र ने कुल 42.3 करोड़ डॉलर के योगदान की मांग की है. उन्होंने कहा कि नेपाल भूकंप में कई मंदिरों, पूजास्थलों और विरासत स्थलों के साथ 500,000 से ज्यादा घर तबाह हो गए हैं.

हमारा तत्काल ध्यान बेघरों को आश्रय प्रदान करना और घरों का पुनर्निर्माण करना है. कई क्षेत्रों में सड़कों का भी दोबारा निर्माण किया जाएगा,उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर नेपाल के बुनियादी ढांचे को बड़ी हानि पहुंची है. हालांकि, हवाईअड्डों से विमानों का आवागमन हो रहा है. विद्युत ग्रिड और दूरसंचार प्रणाली सही तरीके से काम कर रही है और बांध भी सुरक्षित हैं.

 

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