भारतीय सेना प्रमुख मनोज पांडे बोले- देश के लिए 'आत्मनिर्भरता' बेहद जरूरी, हमने रूस-यूक्रेन युद्ध से सीखा
भारतीय सेना प्रमुख मनोज पांडे बोले- देश के लिए 'आत्मनिर्भरता' बेहद जरूरी, हमने रूस-यूक्रेन युद्ध से सीखा
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नई दिल्ली: भारतीय सेना के प्रमुख मनोज पांडे (Manoj Pande) ने गुरुवार (26 अक्टूबर) को कहा कि आत्मनिर्भरता रूस-यूक्रेन युद्ध में महत्वपूर्ण सबक में से एक है। उन्होंने कहा कि भारत ने इस मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन किया है। बता दें कि जनरल पांडे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चाणक्य रक्षा संवाद के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। 

सेना प्रमुख ने आगे कहा है कि ‘आत्मनिर्भरता रूस-यूक्रेन युद्ध में प्रमुख सबकों में से एक है और हमने इस मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन किया है। रूस-यूक्रेन युद्ध से सबक यह है कि जमीन, युद्ध का एक प्रमुख क्षेत्र बनी रहेगी जहां आपने सरहदों पर विवाद किया है, जैसा कि हमारे मामले में है। उन्होंने कहा कि, हमें अपने विजय चिह्नों को सही मायने में परिभाषित करना होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि जो एकीकरण या संयुक्तता हमें प्राप्त करनी चाहिए, वह अहम नहीं है। किन्तु मेरे विचार में, लैंड डोमेन अधिक महत्वपूर्ण होने जा रहा है।

 

आर्मी चीफ ने आगे कहा कि, इस समय हम पूरी दुनिया में अभूतपूर्व बदलाव देख रहे हैं। हम अंतर्राष्ट्रीय मामलों में राष्ट्रीय हितों की केंद्रीयता भी देख रहे हैं। वैश्विक मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्व बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि, ‘पिछला साल चुनौतीपूर्ण, मगर संतोषजनक रहा है। जहां तक परिवीक्षण चौकी (OP) की स्थिति का सवाल है, यह स्थिर है और हमने आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से उसी प्रकार निपटा है, जिस प्रकार हमें उनसे निपटना चाहिए था।’

डेटा और नई तकनीक युद्ध के नए इंजन हैं, इस सवाल के जवाब में सेनाध्यक्ष ने कहा कि आधुनिकीकरण और तकनीक क्षमता विकास कार्यक्रम के केंद्र में हैं। हम नई टेक्नोलॉजी के प्रसार पर फोकस कर रहे हैं। हमने 45 विशिष्ट टेक्नोलॉजी को चिन्हित किया है, जिनका हमें पालन करने की जरूरत है। हमने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग के लिए फिलॉसफी को परिभाषित किया है।’ जनरल पांडे ने आगे अग्निवीरों के पहले बैच के शामिल होने पर खुशी जताते हुए कहा कि उनका फीडबैक काफी अच्छा है। 

आर्मी चीफ ने कहा कि ‘40,000 अग्निवीरों का पहला बैच यूनिट में शामिल हो चुका है और क्षेत्र से प्रतिक्रिया शानदार और उत्साहजनक है।’ बता दें कि चाणक्य रक्षा संवाद प्रख्यात वक्ताओं, सैन्य रणनीतिकारों, राजदूतों और रक्षा और रणनीतिक मामलों के क्षेत्र के अग्रणी विचारकों की दो दिवसीय सभा है। यह दक्षिण एशिया और भारत-प्रशांत के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों और रणनीतियों की विस्तृत श्रृंखला पर मंथन करता है।

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