सुख की माया में खोए मन को भगवान भी नहीं बचा सकते!

एक इंसान घने जंगल में भागा जा रहा था। शाम हो गई थी अंधेरे के कारण भागते भागते उसे कुआं दिखाई नहीं दिया और वह उसमें गिर गया। गिरते-गिरते कुएं पर झुके पेड़ की एक डाल उसके हाथ में आ गई तो उसने उस डाल को पकड़ लिया ।

जब उसने नीचे झांका, तो देखा कि कुएं में चार अजगर मुंह खोले उसे देख रहे हैं वह पसीना पसीना हो गया और जिस डाल को वह पकड़े हुए था, उसे भी दो चूहे कुतर रहे थे। इतने में ही एक मदमस्त हाथी आया और पेड़ को जोर-जोर से हिलाने लगा। वह घबरा गया और सोचने लगा कि हे भगवान अब क्या होगा। उसी पेड़ पर मधुमक्खियों का छत्ता लगा था।

हाथी के पेड़ को हिलाने से मधुमक्खियां उडऩे लगीं और शहद की बूंदें टपकने लगीं। तो एक बूंद उसके होठों पर आ गिरी। उसने जब प्यास से सूख रही जीभ को होठों पर फेरा, तो शहद की उस बूंद में गजब की मिठास थी। कुछ पल बाद फिर शहद की एक और बूंद उसके मुंह में टपकी। अब वह इसमें इतना मगन हो गया कि अपनी सारी मुश्किलों को कुछ समय के लिए भूल गया।

तभी उस जंगल से शिव एवं पार्वती अपने वाहन से गुजरे। पार्वती ने शिवजी से उसे बचाने का अनुरोध किया। भगवान शिवजी ने उसके पास जाकर कहा-मैं तुम्हें बचाना चाहता हूं। मेरा हाथ पकड़ लो। उस इंसान ने कहा कि एक बूंद शहद और चाट लूं, फिर चलता हूं। एक बूंद, फिर एक बूंद और हर एक बूंद के बाद अगली बूंद का इंतजार आखिरकार थक-हारकर शिवजी भी वहां से चले गए।

वह जिस जंगल में जा रहा था, वह जंगल है - दुनिया और अंधेरा है अज्ञान, पेड़ की डाली है - आयु , और दिन-रात रूपी चूहे उसे आसानी से कुतर रहे हैं। और घमंड का मदमस्त हाथी पेड़ को उखाडऩे में लगा है। शहद की बूंदें सांसारिक सुख हैं, जिनके कारण मनुष्य खतरे को भी अनदेखा कर देता है.....।

यानी, सुख की माया में खोए मन को भगवान भी नहीं बचा सकते..!

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