कुंडली बताएगी आपके पुर्नजन्म के बारे में

पिछले जन्म में हम क्या थे? ऐसा सवाल लगभग हर व्यक्ति के मन में चलता है. लेकिन क्या सच में पुर्नजन्म होता है? इस बारे में सबके अपने अपने विचार है.

कहा जाता है कि मानव शरीर 5 तत्वों से मिल कर बना है. आकाश, वायु, अग्नि, जल और धरती. जब एक शरीर मरता है तो आकाश तत्व आकाश में समाहित हो जाता है, वायु तत्व वायु में मिल कर बहने लगता है, अग्नि आपके अग्नि तत्व को अपने अंदर समाहित कर लेती है, जल तत्व जल में मिल जाता है, और अंत में बच जाती है राख जो आपके धरती तत्व में समाहित हो जाती है. लेकिन रह जाती है आत्मा, वो कहा जाती है?

आत्मा के बारे में माना जाता है कि आत्मा अमर है और उसका कोई नाश नही कर सकता. पुर्नजन्म का पूरा सिद्धांत ही आत्मा पर आधारित है. अगर आत्मा अमर है तो वो एक शरीर को छोड़ने के बाद एक नए शरीर में दुबारा जन्म लेना होता है और यही पुर्नजन्म है

पुर्नजन्म को एक ओर तरह से समझाया जा सकता है कि इस संसार में सब कुछ नश्वर है और प्रकृति का नियम है कि इस संसार में जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु भी निश्चित है. अगर इंसान ने इस संसार में जन्म लेकर अच्छे काम किये है और वो जन्म मरण के चक्र से मुक्त हो गया है तो उसकी आत्मा अपने परमात्मा के पास वापस चली जाती है किन्तु अगर उस इंसान ने अच्छे काम नही किये है तो उसकी आत्मा को शांति नही मिलती और उसकी आत्मा भटकती रहती है और उसे इस संसार में दुबारा जन्म लेना पड़ता है ताकि वह अपने बुरे कर्मो के फल को भोग सके. इस तरह से जीवन और मृत्यु का चक्र चलता रहता है और इसे ही पुर्नजन्म कहते है. लेकिन अब एक सवाल और आता है कि मनुष्य की आत्मा के शरीर को छोड़ने और उसके दुसरे शरीर में दुबारा जन्म लेने के बीच में आत्मा कहाँ रहती है?

आपके इन्ही सब सवालो के जवाब आपको ज्योतिष शास्त्र में मिल सकते है क्योकि ज्योतिष शास्त्र में मनुष्य के जन्म से लेकर, उसकी मृत्यु तक और फिर मृत्यु से लेकर, उसके पुर्नजन्म तक की हर बात को ग्रहों और नक्षत्रो के आधार पर जाना और समझा जा सकता है. इन्ही सब बातो को आज हम आपको समझाना चाहेंगे.

मरणोपरांत पुर्नजन्म या परलोक
शास्त्रों और पुरानो में लिखा है कि मनुष्य को अपने कर्मो के फल इसी धरती पर भोगने पड़ते है. क्योकि मनुष्य की आत्मा अमर होती है तो वो एक शरीर के नाश होने के बाद दुसरे शरीर में प्रवेश कर लेती है और इस तरह से वो आत्मा अपने पाप और पुण्य कर्मो का फल भोगने के लिए ही पुर्नजन्म लेती है. पुराणों में ये भी लिखा है कि मनुष्य को अपने कर्मो के अनुसार 84 लाख योनियों को भोगना पड़ता है. साथ ही पुरानो में भगवान श्री विष्णु जी के भी दस अवतारों का वर्णन किया गया है. महर्षि श्री पराशर जी के अनुसार भगवान विष्णु का हर अवतार एक ग्रह से जुड़ा हुआ है जैसे उनका राम अवतार सूर्य, कृष्ण अवतार चंद्रमा, नरसिंह अवतार मंगल, बुद्ध अवतार बुध, वामन अवतार गुरु, परशुराम अवतार शुक्र, कूर्म अवतार शनि, वराह अवतार राहू और मतस्य अवतार केतु को दर्शाता है. इनमे से महात्मा बुद्ध के बारे मे एक बात ये भी प्रचलित है कि उन्हें अपने 5000 पूर्व जन्मो के बारे में स्मृतियाँ तक याद थी.

मनुष्य का मन बहुत जिज्ञाषा से भरा होता है और इसीलिए उसके मन में अपने पुर्नजन्म से सम्बंधित बातो को जानने के विचार आते रहते है. ज्योतिष शास्त्र इन सवालों के जवाब आपको आपकी कुंडली के आधार पर देता है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली का पंचम भाव, पंचम भाव का स्वामी और पंचम भाव से स्थित बलवान ग्रह ( सूर्य या चंद्रमा ) का द्रेष्काण और उसकी स्थिति ही पुर्नजन्म के बारे में बता सकता है. महर्षि पराशर के ग्रंथ बृहतपराशर होरा शास्त्र के अनुसार आपके जन्म से ही जो ग्रह ( सूर्य या चंद्रमा ) बलवान होगा, वो ग्रह जिस ग्रह के द्रेष्काण में स्थित हो, उस ग्रह के अनुसार ही जातक का संबंध उस लोक से था अर्थात आपकी कुंडली के पंचम भाव के स्वामी ग्रह से ही आपके पुर्नजन्म के निवास स्थान के बारे में पता चलता है.

पुर्नजन्म में जातक की दिशा – किसी भी जातक की पुर्नजन्म की दिशा का ज्ञान उस जातक की कुंडली के पंचम भाव में स्थित राशि के अनुसार पता चलता है.


पुर्नजन्म में जातक की जाति – जातक की पुर्नजन्म के जाति का पता भी जातक की कुंडली में उसके पंचमेश ग्रह की जाति से पता चलता है. अर्थात पंचमेश ग्रह की जो जाति आपकी कुंडली में है वो जाति जातक की पिछले जन्म में थी.

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