यहाँ बेचा जा रहा है नकली खून

style="text-align: justify;">राजस्थान / भरतपुर : मिलावट के इस दौर में आपने नकली घी, नकली मावा और भोजन में काम आने वाले कितने ही पदार्थों को नकली तरह से तैयार किए जाने और बेचे जाने की बातें सुनी होेंगी मगर क्या आपने इंसान के शरीर में दौड़ने वाले खून के नकली होने की बात सुनी है। यदि नही तो आप यह खबर पढ़कर चौैक जाऐंगे। जी हां, भरतपुर में इन दिनों ऐसा ही कारोबार चल रहा है। इंसान की कीमती जिंदगी की परवाह किए बिना ही यहां अमानक स्तर का और मिलावटी खून सप्लाय किया जाता है। हालत तो यह है कि पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे यह खेल बरसों से चल रहा है। 

हद तो तब हो गई जब क्षेत्र के जनाना अस्पताल में भर्ती प्रसूता का पति करीब साढ़े तीन हजार रूपए में यह रक्त खरीदकर लाया था मगर जब चिकित्सक ने उसे बताया कि वह तो नकली खून लेकर आ गया है तो उसके पैरों की जमीन ही खिसक गई। मामले को लेकर पुलिस केवल जांच तक ही सीमित रही। यही नहीं ब्लड बैग पर चेरिटेबल ब्लड बैंक की पर्ची लगी थी लेकिन इस पर बैग की सही तारीख और उसका कोड नंबर नहीं था। डाॅक्टर्स का मानना है कि यदि इस तरह का खून चढ़ा दिया जाता तो मरीज की जिंदगी भी जा सकती थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला को जयपुर रैफर कर दिया गया। 

संक्रामक रोगों का डर अमानक स्तर का रक्त बेचकर मौत के सौदागर अपने पास नोटों की गड्डियां तो जमा कर रहे हैं लेकिन वे इस बात से बेखबर हैं कि जानेअनजाने ही वे किसी स्वस्थ्य और बेकसूर व्यक्ति को एड्स, हेपेटाईटिस, ब्लड केंसर आदि रोगों से ग्रसित कर रहे हैं। दरअसल नकली रक्त होने पर जब इसके बैग का परीक्षण ही नहीं हो पाता तो इस बात की ग्यारंटी भी नहीं रहती कि रक्त एचआईवी संक्रमित नहीं है। यदि इस तरह के रक्त के संपर्क में व्यक्ति का रक्त आ जाता है तो उसके जीवन में अंधेरा छा सकता है।
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