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मर्म स्पर्श लेख: आखों से अश्रुधारा बह निकली
मर्म स्पर्श लेख: आखों से अश्रुधारा बह निकली

मैं एक दुकान में खरीददारी कर रहा था, तभी मैंने उस दुकान के कैशियर को एक 5-6 साल की लड़की से बात करते हुए देखा कैशियर बोला : "माफ़ करना बेटी, लेकिन इस गुड़िया को खरीदने के लिए तुम्हारे पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं, फिर उस छोटी सी लड़की ने मेरी ओर मुड़ कर मुझसे पूछा:"अंकल, क्या आपको भी यही लगता है कि मेरे पास पूरे पैसे नहीं हैं ?'' मैंने उसके पैसे गिने और उससे कहा: "हाँ बेटे, यह सच है कि तुम्हारे पास इस गुड़िया को खरीदने के लिए पूरे पैसे नहीं हैं" पर वह नन्ही सी लड़की अभी भी अपने हाथों में वही गुड़िया थामे हुए खड़ी थी। मुझसे रहा नहीं गया इसके बाद मैंने उसके पास जाकर उससे पूछा कि यह गुड़िया वह किसे देना चाहती है ?

इस पर उसने उत्तर दिया कि यह वो गुड़िया है, जो उसकी बहन को बहुत प्यारी है। और वह इसे, उसके जन्मदिन के लिए उपहार में देना चाहती है। बच्ची ने कहा यह गुड़िया पहले मुझे मेरी मम्मी को देना है, जो कि बाद में मम्मी जाकर मेरी बहन को दे देंगी" यह कहते-कहते उसकी आँखें नम हो आईं थी मेरी बहन भगवान के घर गयी है

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