पिता का प्यार सबसे अलग

By Rahul Savner
Oct 28 2015 02:58 PM
पिता का प्यार सबसे अलग

वो थे पापा . . . . . . .

जब मम्मी जोर से डाँट रहीं थी 

तो कोई चुपके से हँसा रहा था, 

तो वो थे पापा. . . 

जब मैं सो रहा था तब कोई 

चुपके से सिर पर हाथ फिरा रहा था ,

तो वो थे पापा. . .

जब मैं सुबह उठा तो कोई बहुत 

थक कर भी काम पर जा रहा था ,

तो वो थे पापा. . .

खुद कड़ी धूप में रह कर 

कोई मुझे ए.सी. में सुला रहा था 

तो वो थे पापा. . .

सपने तो मेरे थे

पर उन्हें पूरा करने का रास्ता 

कोई और बताऐ जा रहा था ,

तो वो थे पापा. . .

मैं तो सिर्फ अपनी खुशियों में हँसता हूँ,

पर मेरी हँसी देख कर कोई

अपने गम भुलाऐ जा रहा था ,

तो वो थे पापा. . .

फल खाने की ज्यादा जरूरत तो उन्हें थी,

पर कोई मुझे सेब खिलाए जा रहा था ,

तो वो थे पापा. . .

खुश तो मुझे होना चाहिए

कि वो मुझे मिले, पर मेरे जन्म लेने की

खुशी कोई और मनाए जा रहा था ,

तो वो थे पापा. . .

ये दुनिया पैसों से चलती है 

पर कोई सिर्फ मेरे लिए पैसे

कमाए जा रहा था , 

तो वो थे पापा. . .

घर में सब अपना प्यार दिखाते हैं  

पर कोई बिना दिखाऐ भी

इतना प्यार किए जा रहा था ,

तो वो थे पापा. . . 

पेड़ तो अपना फल खा नही सकते 

इसलिए हमें देते हैं...

पर कोई अपना पेट खाली रखकर भी

मेरा पेट भरे जा रहा था , 

तो वो थे पापा. . .

मैं तो नौकरी के लिए घर से बाहर जाने 

पर दुखी था पर मुझसे भी अधिक

आंसू कोई और बहाए जा रहा था ,

तो वो थे पापा. . .

मैं अपने "बेटा" शब्द को सार्थक बना सका

या नही.. ये मुझे पता नहीं... पर कोई बिना स्वार्थ के 

अपने "पिता" शब्द को सार्थक बनाए जा रहा था ,

तो वो थे पापा. . .