Easter Day : इस दिन पुनर्जीवित हुए थे भगवान यीशु

क्रिसमस डे और वैलेंटाइन्स डे की एक तारीख होती है जिसे याद रखना आसान रहता है. लेकिन बात करें ईस्टर डे की तो उसकी कोई तारीख तय नहीं है. ये हर साल बदलती है जिसे याद भी नहीं रखा जा सकता. ईस्टर डे को 22 मार्च से लेकर 25 अप्रैल के बिच कभी भी मनाया जा सकता है. साल 2018 की बात करें, तो इस बार ये 1 अप्रैल को मनाया जायेगा.

ये दिन ईसाईयों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन होता है. बता दें, ईसाई धर्म की कुछ मान्यताओं के अनुसार ईस्टर शब्द की उत्पत्ति ईस्त्र शब्द से हुई है. ईसाईयों के ग्रन्थ में ये बताया गया है कि सूली पर लटकाने के तीन दिन बाद भगवान यीशु पुनर्जीवित हो गए थे जिसके बाद 'ईस्टर डे' या 'ईस्टर रविवार' मनाते हैं.

ये दिन गुड फ्राइडे के दो दिन बाद मनाया जाता है. इस साल गुड फ्राइडे 30 मार्च को मनाया जायेगा जिसके दो दिन बाद 1 अप्रैल को ईस्टर डे मनाया जायेगा और 2 अप्रैल को इसी ख़ुशी में अवकाश होगा. ईस्टर काल चालीस दिनों का होता है. इस काल को उपवास, प्रार्थना और प्रायश्चित करने के लिए माना जाता है.

ईस्टर रविवार के पहले सभी गिरजाघरों में रात्रि जागरण और अन्य धार्मिक परंपराएं पूरी की जाती है जो इनके त्यौहार से जुड़ी हुई होती हैं.  ईस्टर को हर साल वसंत की पहली पूर्णिमा के पहले रविवार को मनाया जाता है. जिस दिन ये पूर्ण चाँद दिख जाता है उसके पहले ही रविवार को इस त्यौहार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है.

इस त्यौहार पर अण्डों को भी खास माना जाता है जो बिना शैल के होते हैं. उन्हें क्रिस्ट की एक खाली कब्र की तरह माना जाता है. इस दौरान अण्डों को चॉकलेट से सजाया जाता है और उसके बाद सभी कार्यक्रम के बाद इन्हें खाया जाता है. अंडे और चॉकलेट खाना इस त्यौहार की एक परम्परा है.

बता दें, पहला चॉकलेट ईस्टर एग ब्रिटेन में बनाया गया था. इस दिन कई सारी मोमबत्तियां जलाई जाती है और भगवाम यीशु से प्रार्थना की जाती है. इन मोमबत्तियों को घरों में जलाना और इन्हें अपने परिजनों में बांटना एक प्रसिद्द परंपरा है जिसे इस त्यौहार पर निभाया जाता है.

 

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