ईस्टर पर यहां होता है कुछ अलग
ईस्टर पर यहां होता है कुछ अलग
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क्या है ईस्टर सन्डे? क्यों मनाया जाता है ईस्टर सन्डे? क्या है ईस्टर सन्डे की मान्यताएं? भारत त्यौहारों का देश है. सबसे ज्यादा त्यौहार मनाने वाले देश भारत में कई लोग जानते ही नहीं कि किस त्यौहार की क्या महत्वता है. आइये हमारी इस खबर के माध्यम से हम आपको बताते हैं कि संडे के आगे ईस्टर क्यों लगाया जाता है. ईसाई धर्म की मान्यताओं के अनुसार बताया गया है कि प्रभु यीशु यानी लॉर्ड जीसस को सूली पर लटकाये जाने के तीसरे दिन यानी ईस्टर संडे के दिन वह वापस जीवित हो गए थे. उनके पुनः जीवित होने के बाद वह अपने शिष्यों और मित्रों के साथ 40 दिन तक रहे थे और फिर बाद में वह स्वर्ग सिधार गए. यह मान्यता है कि ईसाई धर्म को सबसे पहले यहूदी लोगों ने अपनाया था. यहूदियों ने ही प्रभु के दुबारा जी उठने को ईस्टर का नाम दिया था.

ईस्टर को नए जीवन में आए परिवर्तन का प्रतीक मानते हुए सेलिब्रेट किया जाता है. देखा जाता है कि सभी गिरजा घरों में भोर के वक़्त महिलाओं द्वारा आराधना की जाती है. मान्यता यह भी है कि भोर के वक़्त ही प्रभु यीशु का पुनरुत्थान हुआ था और सबसे पहले उन्हें मरियम मगदलीनी ने उनकी खबर बाकी महिलाओं को दी थी. इस परंपरा को सनराइज सर्विस कहते हैं. अलग-अलग देशों में इसे अलग-अलग तरीके से सेलिब्रेट किया जाता है. जर्मनी में ईस्टर के दिन खरगोश और रंग-बिरंगे अंडे खोजे जाते हैं, जिसे उर्वरता यानि फर्टिलिटी का प्रतीक माना जाता है. वही पोलैंड की बात की जाए तो यहां रंगीन पानी फेंका जाता है. इटली और स्पेन में गुड फ्राइडे के दिन लोगों का जुलूस निकाला जाता है और सभी लोग कंधे पर क्रॉस लेकर सड़कों से गुज़रते हैं.

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