बैंको के नए साल की ख़राब रही शुरुआत
बैंको के नए साल की ख़राब रही शुरुआत
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नई दिल्ली : जहाँ हर कही नए साल के आगमन पर खुशियां मनाई जा रही है तो वहीँ यह खबर सामने आ रही है कि बैंकों के लिए यह शुरुआत अच्छी नहीं रही है. बताया जा रहा है कि बैंकों के बहीखातों में नुकसान देखने को मिल रहा है. इसके साथ ही यह बात भी सामने आ रही है कि फ़िलहाल बैंकों के ऊपर 60 अरब डॉलर के करीब यानी 4000 अरब रुपये के बराबर का ना वसूल किया जा सकने वाला ऋण बकाया है. और यहाँ कहा जा रहा है कि बैंको को यदि यह राशि हासिल करना है तो इसके लिए उन्हें 2016 में काफी अहम प्रयास भी करना होंगे.

रिज़र्व बैंक ने इस बारे में राशि को वसूल किये जाने को लेकर समयसीमा भी तय की है. इसके साथ ही यह बात भी सामने आ रही है कि बैंकर्स का भी इस मामले में यह मत सामने आया है कि आगे जाकर बैंकिंग के लिए टेक्नोलॉजी ही कही महत्वपूर्ण होने वाली है. और इसको लेकर ग्राहकों को प्रदान की जाने वाली सर्विस भी काफी महत्वपूर्ण होने वाली है.

ऐसे में यह कहा जा रहा है कि सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बैंकों के बीच भी प्रतिस्पर्धा बढ़ जाना है. इस मामले में जानकारी देते हुए ICICI बैंक की मुख्य कार्यकारी चंदा कोचर का यह बयान सामने आया है कि इस क्षेत्र में निरंतर नवोन्मेष टेक्नोलॉजी सेक्टर के साथ होना है और इसके साथ ही ग्राहकों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं में भी इजाफा होना है.

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