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बचपन में विवाह करने का परिणाम
बचपन में विवाह करने का परिणाम

जयपुर : भले ही सरकार ने लड़के और लड़की के लिये विवाह की उम्र को तय कर रखा हो लेकिन इसके बाद भी राजस्थान तथा अन्य प्रदेशों में बाल विवाह की प्रथा रूकने का नाम नही लेती है। इसका ही यह परिणाम है कि राजस्थान में ही बाल विधवा और तलाकशुदा बच्चों का आंकड़ा बहुत अधिक हो गया है।

एक रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में करीब दस से पंद्रह वर्ष के बच्चे या तो तलाकशुदा जीवन जी रहे है या फिर उन्हें वैधव्य भोगने के लिये मजबूर होना पड रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ताजा आंकड़ों में 300 से अधिक बच्चे तलाकशुदा है जबकि विधवा बच्चियों का आकड़ा तीन हजार से अधिक बताया जाता है।

यह सब होता है बाल विवाह का परिणाम के फलस्वरूप। रिपोर्ट में बताया गया है कि या तो बाल विवाह होने के कुछ ही दिन बाद आपस में पटरी बैठती नहीं या फिर ससुराल वाले अपनी मनमर्जी से शादीशुदा बच्चों को अलग कर देते है।

रिपोर्ट के अनुसार बाल विवाह का आंकड़ा ही तीन करोड से अधिक है वहीं इनमें से ऐसे बच्चे भी शामिल है जिनक उम्र दस वर्ष से भी कम है। इस संबंध में राजस्थान विवि के राजीव गुप्ता ने बताया कि अलगववाद का मामले या तो दहेज के कारण होते है या फिर अवैध संबंध भी बच्चों के जीवन को अलग अलग कर देता है।

ऐसी स्थिति में विवाहित बच्चे या तो नारकीय जीवन जीने पर मजबूर हो जाते है या फिर वे आत्महत्या जैसे कदम भी उठाने के लिये पीछे नहीं हटते। सरकार चाहते हुये भी बाल विवाह को रोकने में असमर्थ है। विशेषकर दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में तो होने वाले बाल विवाह की भनक तक प्रशासन के अधिकारियों को नहीं लग पाती है।

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