क्या महाशक्ति की कुर्सी छीनने के भय में भारत से डर रहा अमेरिका ?

 

दुनिया के ताकतवर देशों में शामिल अमेरिका में पहले ही कोरोना वायरस ने अपना संक्रमण फैला रखा है. वही, दूसरी ओर कुछ दिनों से व्‍हाइट हाउस के सामने सैकड़ों की संख्‍या में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. ये प्रदर्शन जॉर्ज फ्लॉयड नाम के अश्वेत की कस्‍टडी में हुई मौत के बाद शुरू हुए हैं. सिर्फ वाशिंगटन में ही नहीं बल्कि देश के कई राज्‍यों में इस तरह के प्रदर्शन हो रहे हैं. लोग सरकार पर लगातार मानवाधिकार के हनन का आरोप लगा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन अपने यहां पर हो रही इस तरह की घटनाओं से आंखें मूंद कर भारत पर लगातार मानवाधिकार के उल्‍लंघन का आरोप लगा रहा है. अश्‍वेत की मौत के बाद भड़की हिंसा ने व्‍यापक रूप इख्तियार कर लिया है. इसके मद्देनजर 12 से अधिक प्रमुख शहरों में रातभर कर्फ्यू लगा दिया गया है.

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मिनीपोलिस में समेत नैशविले और जॉर्जिया में आपात स्थिति लागू करके सुरक्षा के लिए नेशनल गार्ड तैनात कर दिए गए हैं. इसके अलावा लोगों को मियामी, पोर्टलैंड, लुइसविले, अटलांटा, डेनवर, लॉस एंजिलिस, सिएटल और मिनीपोलिस की सड़कों से दूर रहने के लिए कहा गया है. मिसीपीसी विश्वविद्यालय परिसर में शनिवार को एक कोनफेडरेट स्मारक पर पंजे के लाल निशान के साथ आध्यात्मिक नरसंहार' लिख दिया. पुलिस द्वारा अफ्रीकी-अमेरिकियों के साथ वर्षों से हो रहे कथित बुरे बर्ताव के कारण लोगों का ये गुस्सा फूटा है.

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इसके अलावा अमेरिका के इतिहास पर यदि नजर डालें तो इस तरह की ये अकेली घटना नहीं है. इसके बाद एक सवाल सभी के जहन में आना लाजिमी है कि आखिर इस तरह की घटनाओं के बाद भी भारत पर मानवाधिकारों को लेकर बेबुनियाद आरोप लगाने के पीछे आखिर क्‍या मंशा हो सकती है.

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