'मंदिर जलाया, जिन्दा जल गए हिन्दुओं के 4 बच्चे..', पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों पर अत्याचार जारी, Video

इस्लामाबाद: 1947 में भारत से अलग होकर इस्लामी मुल्क बने पाकिस्तान में हिंदुओं की हालत बद से बदतर हो चुकी है। इस देश में हिन्दू दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। पड़ोसी मुल्क में आए दिन हिन्दू लड़कियों के बलात्कार होते हैं, उन्हें जबरन मुस्लिम बनाकर अधेड़ों से उनके निकाह करवा दिए जाते हैं। हिंदूओं के मंदिरों पर आए दिन हमला होता है और उन्हें तोड़ा जाता है। इन्ही सब अत्याचारों को झेलते हुए बंटवारे के बाद पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी निरंतर कम होती चली गई। अब इस देश में हिंदुओं का जीना भी दूभर हो चुका है। अब पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के अत्याचार का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो को देखने के बाद आप भी अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाएंगे। वीडियो वाकई दिल को दहला देने वाला है। 

 

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं वीडियो में एक युवक रोते हुए नज़र आ रहा है और दुःख में छाती पीट-पीटकर अपनी बात कह रहा है। युवक चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा है कि हमारे मंदिरों को जला दिया। हमारे 4 बच्चे जल कर मर गए। हम बेघर हो गए हैं। हमारी कोई मदद करों। वायरल हो रहे वीडियो में युवक आगे कह रहा है कि पाकिस्तान की सरकार ने लूट लिया हमको। हम गरीब लोग अब किधर जाए। युवक रोते हुए कहता है कि हमारे मंदिर जला दिए, हमारे घर जला दिए। वीडियो में आप देख सकते हैं कि मौके पर बहुत भीड़ जमा है। इसी वीडियो में आप पीछे से एक महिला को भी चीखती हुई सुनाई दे रही हैं। महिला कहती है कि हमारे मंदिरों को जला दिया। हालाँकि, वायरल हो रहा वीडियो कब का और पाकिस्तान में किस जगह का है, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। 

पाकिस्तान हिंदू राइट्स मूवमेंट के अनुसार, जब 1947 में पाकिस्तान, भारत से अलग होकर मुस्लिम देश बना था, उस समय पाकिस्तान के हिस्से में 428 मंदिर थे। मगर, दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से 408 मंदिरों को 1990 के दशक आते-आते रेस्तरां, होटल, सरकारी स्कूलों या मदरसों में तब्दील कर दिया गया। आज की तारीख में पाकिस्तान में बस इतने ही मंदिर बचे हैं कि जिन्हे आप अपनी उंगलियों पर गिन सकते हैं। हालाँकि, जब इन पीड़ितों को सुरक्षित जीवन देने के लिए उन्हें भारत की नागरिकता प्रदान करने हेतु CAA कानून लाया गया था, तो भारत के मुस्लिम समुदाय और तमाम विपक्षी दलों ने इसका पुरजोर विरोध किया था। यहाँ तक दावे किए गए थे कि, पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों पर कोई जुल्म नहीं होता और सरकार झूठे आंकड़े पेश कर रही है। 

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