500 कोरोना केस होने पर 'लॉकडाउन' में थे हम, आज साढ़े 3 लाख सक्रीय मामले, क्या फिर होगी तालाबंदी ?

नई दिल्ली: कोरोना वायरस के चलते आज से ठीक एक वर्ष पूर्व पीएम मोदी ने 23 मार्च को रात 8 बजे देश में लॉकडाउन की घोषणा की थी। रेलवे, हवाईजहाज, दुकानें, बसें, कारखाने और हजारों कंपनियों सहित करीब सभी जरूरी साधनों को बंद करना पड़ा और लोग घरों में कैद हो गए थे। यानी एक चलता फिरता भारत अचानक रुक सा गया था। लॉकडाउन जब लागू किया गया था, तब देश में कोरोना के 500 केस थे, जो कि अब 1,17,34,058 हो चुके हैं। इसमें से तीन लाख 68 हजार 457 सक्रीय मामले हैं। वहीं, वैक्सीन आने के बाद 5 करोड़ से अधिक लोगों को कोरोना वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है।

जानें एक साल पहले कैसे लगा था लॉकडाउन:-

1- जब पहली बार लॉकडाउन का ऐलान किया गया था, तो देश में केवल 500 कोरोना केस थे और कोविड-19 के कारण तक़रीबन 50 लोगों की मौत हुई थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, आज संक्रमण का आंकड़ा बढ़कर 11.73 मिलियन हो गया है। मरने वालों की तादाद 1,60,441 पहुंच गई है।

2- यह एक राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन था, जिसके तहत आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी को प्रतिबंधित कर दिया गया था। निजी, वाणिज्यिक, शैक्षिक और सरकारी समेत सभी प्रतिष्ठानों को बंद रहने के लिए कहा गया था।

3- विशेषज्ञों के मुताबिक, लॉकडाउन ने महामारी के बढ़ने की दर को धीमा कर दिया था। लॉकडाउन के प्रथम चरण से पहले, कोविड -19 मामलों की दोहरीकरण दर तक़रीबन 3 दिन थी, यह 18 अप्रैल, 2020 तक हर 6.2 दिनों के वक़्त में दोगुनी होने लगी।

4- गत वर्ष 15 अप्रैल को, लॉकडाउन को अगले 19 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया था। 17 मई तक इसे 14 दिनों के लिए फिर से बढ़ा दिया गया। लॉकडाउन का अंतिम चरण 31 मई तक 14 दिनों तक जारी रहा था। जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन खोला गया था। 

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