खास मुद्दे जिन पर जेटली खोल सकते है घोषणाओ का पिटारा....

नई दिल्ली। अबकी बार बजट में भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली व भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक प्रकार से अग्निपरीक्षा है. मोदी व अरुण के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का तीसरा बजट लोगो की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है इस पर सभी की निगाहे इस आम बजट में रहेगी. इसमें जहां वित्त मंत्री के सामने सुस्ती झेल रही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और नोटबंदी से हुए राजनीतिक नुकसान की भरपाई के लिए आम आदमी, किसान और इंडस्ट्री को लुभाने की चुनौती है आइये बताए वही कुछ अहम मुद्दे जिन पर बजट में जेटली घोषणाएं कर सकते हैं... 

घर का सपना जल्द कैसे हो पूरा:   आपको बता दे की बजट में वित्त मंत्री से इसी बात की उम्मीद है कि वह हाउसिंग सेक्टर में डिमांड लाने के लिए टैक्स इंसेटिव से लेकर स्टााम्प ड्यूटी कटौती के लिए जरूरी कदम उठाने के ऐलान करेंगे। खास तौर से डीमोनेटाइजेशन के बाद बुरी तरह से नेगेटिव डिमांड झेल रहे रियल एस्टेट सेक्टर को एक बूस्टर की उम्मीद है। जहां पर नौकरियां भी बड़े पैमाने पर गई हैं। ऐसे में वित्त मंत्री अरुण जेटली होम लोन पर मिलने वाली 2.5 लाख रुपए तक की टैक्स छूट का दायरा बढ़ाने जैसे कदम उठा सकते हैं. 

मिडिल क्लास को खुश करने का रहेगा प्रेशर:

बजट में टैक्स छूट देकर मिडिल क्लास को खुश करने का प्रेशर भी रहेगा, इस बार के बजट में फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली से सबसे ज्यादा उम्मीद पर्सनल इनकम टैक्स छूट लिमिट बढ़ाने की है। डीमोनेटाइजेशन के बाद जिस तरह से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है, उसे देखते हुए मिडिल क्लास टैक्स स्लैब में बड़ी छूट की उम्मीद कर रहा है। इकोनॉमिस्ट और एनॉलिस्ट का मानना है कि जेटली को इस बार टैक्स छूट की लिमिट जरूर बढ़ानी चाहिए। एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार इस बार 2.5 लाख रुपए तक टैक्स छूट की लिमिट को बढ़ाकर 3 लाख रुपए किया जाना चाहिए। वहीं कुछ एक्सपर्ट इसे 4 लाख रुपए करने की डिमांड कर रहे हैं।    कॉरपोरेट जगत को वित्त मंत्री से बड़े बूस्ट की उम्मीद:   डीमोनेटाइजेशन और ग्लोबल फैक्टर की वजह से कॉरपोरेट जगत को वित्त मंत्री से बड़े बूस्ट की उम्मीद है। इसके तहत कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के पुराने वादे को पूरा करने से लेकर एक्साइज टैक्स आदि में कमी की भी जेटली से उम्मीद है। दो साल पहले के बजट में जेटली ने कॉरपोरेट टैक्स को 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करने का ऐलान किया था। हालांकि अभी तक इस दिशा में कदम नहीं उठाया गया है। जेटली के लिए इस बार इसलिए भी चैलेंज हैं क्योंकि प्राइवेट सेक्टर से इन्वेस्टमेंट लगभग रुक सा गया है।     किसानों को चाहिए बड़ी राहत   भारत में किसानों  देश में किसानों के आत्महत्या के जिस तरह से मामले बढ़े हैं, उससे यह साफ है कि रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद उसकी माली हालत खराब है। इसकी एक प्रमुख वजह लागत की तुलना में कीमत कम मिलना है। ऐसे में इस बार एग्रीकल्चर सेक्टर को बूस्ट करने के लिए जेटली एग्रीकल्चर क्रेडिट का टारगेट 9 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपए तक कर सकते हैं। वहीं शार्ट टर्म लोन से लेकर लॉन्ग टर्म लोन के इंटरेस्ट रेट में कटौती से लेकर, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना और फसल बीमा योजना को बेहतर तरीके से लागू करने का रोडमैप पेश कर सकते हैं।   इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट 

इकोनॉमी को रिवाइव करने के लिए सरकार को सबसे ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाना होगा। खास तौर से रोड, एविएशन, रेलवे, शिपिंग जैसे सेक्टर में तेजी से खर्च बढ़ाने होंगे। जेटली के लिए इसलिए भी चैलेंज है कि वह हर 30 किलोमीटर सड़क बनाने के टारगेट की तुलना में वह केवल 16 किलोमीटर ही कर पा रहे हैं। इसके अलावा उनके सामने शुरू नहीं हो पाए  हाईवे प्रोजेक्ट्स को शुरू करने की प्रमुख चुनौती होगी। इसी तरह सिविल एविएशन, रेलवे जैसे प्रमुख सेक्टर पर खर्च बढ़ाकर जेटली इकोनॉमी को रिवाइव करने के लि‍ए अहम कदम उठा सकते हैं।

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