बलात्कार पर बयान से लेकर 'गेस्ट हाउस कांड' तक, विवादित रहा है 'मुलायम' का सियासी करियर

लखनऊ: आज समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव का जन्मदिवस है। मुलायम को उनके प्रशंसक 'नेताजी' कहा करते थे। एक दौर था, जब उत्तर प्रदेश की सियासत 'मुलायम' के नाम के इर्द-गिर्द ही घुमा करती थी। वर्ष 1939 में आज ही के दिन यानि 22 नवम्बर को इटावा जिले के छोटे से गांव सैफई (Saifai) में जन्में मुलायम सिंह ने एक सामान्य से परिवार से निकलकर पूरे यूपी की सियायत में अपना दबदबा जमाया। हालांकि, मुलायम की सियासी यात्रा उनके कामों से अधिक विवादों के लिए जानी जाती है। वह तीन बार यूपी के CM बने, एक बार देश के रक्षामंत्री भी बने, पर हर बार उनके विवादित बयान और विवादित काम उनके इर्द गिर्द घूमते रहे। उनके कुछ ऐसे ही विवाद आज उनके जन्मदिन पर हम आपको बताने जा रहे हैं, जो उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की सियासत में भी चर्चा में रहे।   

बलात्कार पर मुलायम का विवादित बयान:-

समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव तब विवादित बयान देकर निशाने पर आ गए जब मुरादाबाद में आयोजित की गई एक रैली में मुलायम ने कहा कि बलात्‍कार के मामलों में फांसी की सजा देना अनुचित है। लड़के हैं लड़कों से गलतियां तो हो जाती हैं। मुलायम ने कहा था कि दुष्कर्म के मामलों में फांसी नहीं होनी चाहिए। लड़कों से गलती हो जाती है और इसके लिए फांसी नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा था कि कभी-कभी फंसाने के लिए भी लड़कों पर इल्जाम लगा दिया जाते हैं। लड़कों से गलतियां हो जाती हैं। ऐसे कानूनों को बदलने की आवश्यकता है। मुलायम सिंह यादव का यह बयान उस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था।

जब मुलायम के आदेश पर कारसेवकों पर चली थी गोलियां:-

30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में कारसेवा के लिए हजारों रामभक्त जुटे थे। इस दौरान मुलायम सिंह यादव यूपी के सीएम थे। विश्व हिन्दू परिषद् (विहिप) के इस कार्यक्रम से बौखलाए मुलायम सिंह यादव ने जबरदस्त सख्ती का आदेश दे दिया। कारसेवकों ने जब राममंदिर की ओर बढ़ना शुरू किया तो पुलिस ने पहले उन पर लाठीचार्ज किया और फिर बाद में मुलायम के आदेश के बाद रामभक्तों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी गई। इसमें सैकड़ों कारसेवकों की मौत हो गई थी और कई जख्मी हुए थे। बाद में 6 फरवरी 2014 को मैनपुरी जिले में आयोजित एक जनसभा में मुलायम सिंह यादव ने स्वीकार किया था कि उनके ही आदेश पर 1990 में पुलिस ने अयोध्या में कार सेवकों पर फायरिंग की गई थी। वहीँ, इस आदेश के बाद लोगों ने मुलायम सिंह को मुल्ला मुलायम कहना शुरू कर दिया था।  रामभक्तों पर गोली चलवाने की घटना के बाद 1991 में हुए विधानसभा चुनावों में मुलायम सिंह बुरी तरह पराजित हुए और भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में कामयाब हुई थी। 

मुलायम के ही इशारे पर हुआ था गेस्ट हाउस कांड:-

यूपी की सियासत में 2 जून 1995 का दिन स्टेट गेस्ट हाउस कांड के नाम से जाना जाता है। उस वक़्त बसपा के प्रमुख कांशीराम थे। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने 1993 में कांशीराम के साथ गठबंधन करके राजनीति की नई इबारत लिखी थी। दोनों पार्टियों ने विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा और सत्ता तो हासिल कर ली, मगर दो साल बाद ही इस रिश्ते में वो मोड़ आया, जिसने यूपी की सियासत को बदलकर रख दिया। गठबंधन सरकार में आपसी टकराव के कारण 2 जून 1995 को बसपा ने सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा कर दी। इससे मुलायम सरकार अल्पमत में आ गई। इससे आगबबूला हुए सपा कार्यकर्ताओं ने सारी मर्यादा लांघते हुए सांसद, विधायकों की अगुआई में लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस का घेराव शुरू कर दिया। बताया जाता है उस समय बसपा नेता मायावती इसी गेस्ट हाउस के कमरा नंबर 1 में ठहरी हुईं थीं।  बसपा के MLA और कार्यकर्ता भी वहां मौजूद थे, मगर मुलायम सिंह के कार्यकर्ताओं ने उन्हें बंधक बना लिया था। स्थिति ये हो चुकी थी कि सपा के दबंग नेता, बसपा के विधायकों को किडनैप करने लगे और मायावती ने अपने आप को बचाने के लिए रूम अंदर से बंद कर लिया। कई घंटों तक ये ड्रामा चलता रहा। आखिरकार भाजपा के कुछ नेताओं के दखल करने से मामला राजभवन पहुंचा और पुलिस सक्रिय हुई और किसी प्रकार मायावती को वहां से बचाकर निकाला गया।   

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