क्या आप जानते है हर साल बाढ़ से क्यों जूझता है भारत और क्या इसे रोका जा सकता है ?

नई दिल्ली। बारिश का मौसम लगभग सभी को अच्छा लगता है। ग्रीष्म ऋतू में भारी गर्मी से परेशान हर व्यक्ति बारिश की ही कामना करता है। किसान भी अपनी फसलों के लिए बारिश की दुआ करते है लेकिन कई बार यही बारिश वरदान की जगह अभिशाप भी बन जाती है और जान-माल का गंभीर नुकसान भी कर जाती है। यह स्थिति तब और बिगड़ जाती है जब बारिश बाढ़ का रूप ले लेती है। इसका एक ताजा उदाहारण है केरल में आई भीषण बाद त्रासदी। 

सिर्फ केरल ही नहीं बल्कि तमिलनाडु, उत्तराखंड, दिल्ली, यूपी और कई अन्य राज्य भी तक़रीबन हर साल भारी बारिश और बाढ़ की मार झेलते रहते है। हर साल बाढ़ आने के वक्त ऐसे सवाल उठते रहते हैं कि यह बाढ़ क्यों आई और इस पर रोक कैसे लगाई जाए या देश में हर साल बाढ़ की परिस्थितियों से क्यों जूझना पड़ता है। लेकिन बाढ़ के सामान्य होने के बाद जनजीवन वापस पटरी पर लौट आता है और ये सवाल भी जहां के तहाँ धरे रह जाते है। 

क्या बाढ़ को रोकने के लिए बनाये गए बांध ही बन रहे है बाढ़ की वजह ?

लेकिन आज हम आपको बताएँगे कि देश के अधिकतर राज्यों में हर साल क्यों बाढ़ के हालत बन जाते है और क्या इसे रोका या काम किया जा सकता है। 

बाढ़ की पहली वजह है जरूरत से ज्यादा बारिश 

भारत के कुछ राज्यों में, ख़ास कर के दक्षिणी राज्यों में भीषण बाढ़ की एक वजह है जरूरत से कही ज्यादा बारिश होना। दरअसल भारत की भौगोलिक परिस्थितिया ऐसी है कि यहाँ के दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बहुत ज्यादा बारिश होती है। मौसम वैज्ञानिको का कहना है कि देश और दुनिया में पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति भी किसी इलाके में जरुरत से ज्यादा बारिश तो कही औसत से बेहद कम बारिश के लिए जिम्मेदार हो सकती है। 

बाढ़ आने का दूसरा बड़ा कारण है नदियों की गहराई कम होना 

देश में बार-बार बाढ़ आने की एक बड़ी वजह यह  भी है कि देश की अधिकतर बड़ी नदियों की गहराई काफी कम हो गई है। इसकी मुख्य वजह है नदियों के तल पर अत्यधिक मात्रा में रेत व कचरा जम जाना। दरअसल नदियों की गहराई कम होने से नदियां भारी बारिश के वक्त अतिरिक्त पानी का भार सहन नहीं कर पातीं और इसलिए आस पास के इलाको में बाढ़ के हालत बन जाते है। असम में ब्रह्मपुत्र नदी और दिल्ली, यूपी में यमुना नदी के तटीय इलाकों में बाढ़ के हालत बनने की मुख्या वजह यही होती है। 

नदियों पर अतिक्रमण  मनुष्य आज जमीन के लिए इतना लालची हो गया है कि उसने नदियों से भी जमीं छीनना शुरू कर दिया है। इलाहबाद, दिल्ली समेत तक़रीबन सभी बड़े शहरों में लोग नदियों के बेहद नजदीक और कई जगहों पर तो नदियों के तटों पर भी घर बनाने लगे है और यही इन इलाको में बाढ़ आने की सबसे बड़ी वजह बन जाते है। अब जब नदियों में जगह ही नहीं बचेगी तो पानी तो शहरों में आएगा ही। 

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सुस्त ड्रेनेज सिस्टम भी है ज़िम्मेदार 

महानगरों में थोड़ी सी भी बारिश में ही बाढ़ जैसे हालत बनने की मुख्य वजह है वह के प्रमुख ड्रैनेज सिस्टम। दरअसल पुराणी पड़ चुकी यह ड्रेनेज प्रणाली महानगरों की बढ़ती आबादी का बोझ संभाल नहीं पातीं है और जब बारिश होती है तो बारिश का पानी इस ड्रैनेज सिस्टम के जरिये निकल नहीं पाता और शहर में जमा  होना शुरू हो जाता है। बारिश बढ़ने के साथ-साथ यह स्थिति बाढ़ का रूप ले  लेती है। इसका सबसे अच्छा उदहारण देश की आर्थिक राजधानी मुंबई है जहा हर साल औसत बारिश में ही घंटों जाम की स्थिति बन जाती है। 

तो इस बात से यह तथ्य सामने आता है कि देश में हर साल आने वाली बाढ़ के लिए सिर्फ कुदरत ही नहीं बल्कि हम मानव भी बराबर के जिम्मेदार है और भविष्य में ऐसी घटनाये तभी रुक पायेगी जब हम इन हादसों से सीखे और अपनी आदतों में बदलाव करते हुए अपनी गलतियां सुधारे। 

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