'चुनाव से पहले सभी को अरेस्ट कर लेंगे..', गिरफ़्तारी के कुछ घंटों बाद ही हेमंत सोरेन के बचाव में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कपिल सिब्बल

रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केंद्रीय जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए आज गुरुवार (1 फ़रवरी) को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका पर शीर्ष अदालत शुक्रवार को सुनवाई करने वाली है।

सोरेन का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील और पूर्व कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका का उल्लेख किया। इसके अतिरिक्त, सिब्बल ने अदालत को सूचित किया कि वे झारखंड उच्च न्यायालय से मामला वापस ले रहे हैं, जहां बुधवार देर रात शुरू में इसका उल्लेख किया गया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का उल्लेख करते हुए जवाब दिया कि, "प्रवर्तन निदेशालय ने हजारों लोगों को गिरफ्तार किया है, हर कोई सुप्रीम कोर्ट नहीं आ सकता है।"

सॉलिसिटर जनरल के बयान के जवाब में सिब्बल ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, ''चुनाव से पहले सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।'' यह घटनाक्रम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के आसपास चल रही कानूनी लड़ाई को उजागर करता है, सुप्रीम कोर्ट आगामी सुनवाई में मामले की जांच करने के लिए तैयार है।

बता दें कि, ED ने हेमंत सोरेन को भूमि घोटाला, खनन घोटाला और कोयला घोटाला में पूछताछ के लिए 10 बार समन जारी किए थे, लेकिन अधिकतर बार मुख्यमंत्री पूछताछ में शामिल नहीं हुए। यहाँ तक कि बीते दिनों वे लगभग 30 घंटों के लिए कथित तौर पर गायब भी हो गए थे। उन्हें भी शायद अपनी गिरफ़्तारी का पहले से अंदेशा था, इसलिए हेमंत सोरेन ने अरेस्ट होने से पहले ही सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। अब पूर्व केंद्रीय मंत्री और वकील कपिल सिब्बल, उनकी गिरफ़्तारी को अवैध ठहराने और उन्हें जमानत दिलवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। 

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