भीषण जल संकट के आसार, इजरायल कर सकता है मदद !

नई दिल्ली : कम बारिश का असर अब गर्मी के मौसम के पहले ही दिखने लगा है. देश के 91 बड़े जलाशयों में उनकी क्षमता का केवल 45 प्रतिशत पानी शेष है. केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार इस साल 25 जनवरी तक इन जलाशयों में 73.029 अरब घन मीटर पानी था, जो पिछले वर्ष के मुकाबले करीब दस फीसद कम है. पिछले साल के मुकाबले पंजाब, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के जलाशयों में इस वर्ष पानी के स्तर में तेजी से कमी दर्ज की गई है.

देश के 91 बड़े जलाशयों में करीब 161.993 अरब घन मीटर पानी जमा किया जा सकता है जो देश की कुल जल संग्रह क्षमता 257.812 अरब घन मीटर का 63 प्रतिशत है. इनमें से 37 जलाशयों पर जलविद्युत परियोजनाएं संचालित की जाती है. इनसे देश को 60 मेगावाट बिजली मिल रही है. इस जल संकट से निपटने के लिए इजरायल मदद कर सकता है. इजरायल के पास जल प्रबंधन की प्रभावी तकनीकें है. इस देश ने दोहरी रणनीति अपनाई. पहले तो पानी की बर्बादी को रोका और फिर पानी सप्लाई के स्रोतों में इजाफा किया. ऐसा करके अब इजरायल भरपूर जल संसाधन वाला देश बन पाया.

इंडो-इजरायली एग्रीकल्चरल कोऑपरेशन प्रोजेक्ट के तहत इजरायल की अंतरराष्ट्रीय विकास सहभागिता एजेंसी माशव और भारत के राष्ट्रीय बागवानी मिशन के बीच करार हुआ है. इस सहयोग के चलते भारतीय किसान 65 फीसद कम पानी के इस्तेमाल में 10 गुना अधिक पैदावार करने में सक्षम हुए. चीन और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से इस्तेमाल होने वाले भूजल से अधिक भूजल भारत में इस्तेमाल होता है. कृषि प्रधान देश होने के नाते यहां सिंचाई में भूजल का प्रयोग होता है.

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