पतंजलि विवाद में सरकार पर आरोप

नागपुर: बाबा रामदेव की कम्पनी पतंजलि ने मेक-इन-इंडिया की तर्ज पर अपने प्रोडक्शन को काफी बढ़ाया है और निरन्तर वृद्धि के साथ पतंजलि प्रोडक्शन के लिए देश के सभी मुख्य शहरो में कंपनी स्थापित करने के लिए जमीन खरीद रहा है, जिसके लिए सरकारी सहायता भी मिल रही है. लेकिन इस प्रक्रिया में सरकार पर कई सवाल खड़े हो गए है, जिसमे सरकार पर पतंजलि को कम भाव में जमीन देने का आरोप है. इस मामले में पब्लिक आरटीआई डॉक्युमेंट बनाने में मदद करने वाले दो सूचना अधिकारियों (पीआईओ) का एक हफ्ते बाद ही तबादला कर दिया गया था.

उल्लेखनीय है कि नागपुर में इस साल मार्च के महीने में फूड पार्क के लिए राज्य सरकार द्वारा बाबा रामदेव को 25 लाख रुपये एकड़ के भाव में जमीन दी थी, पतंजलि आयुर्वेद नागपुर में 600 एकड़ जमीन में फूड पार्क बनाना चाहती है. उक्त मामले में सरकार पर कंपनी को 1 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के भाव वाली जमीन सिर्फ 25 लाख रुपये एकड़ के भाव में देने का आरोप है. सीनियर अधिकारियों और फाइनैंशल रिफॉर्म्स के प्रिंसिपल सेक्रटरी विजय कुमार ने 'प्राइज वार' के इस मुद्दे पर सवाल उठाया था, इसके 12 दिनों बाद ही कंपनी के दो सूचना अधिकारियों के ट्रांसफर की सूचना आई. इससे पहले 8 मार्च को अखबारों में पतंजलि आयुर्वेद को लाभ पहुंचाने वाली इस डील का विरोध करने वाले अफसर विजय कुमार का तबादले  की खबर आई थी.

बता दे कि एमएडीसी के मार्केटिंग मैनेजर और नागपुर ब्रांच में पीआईओ अतुल ठाकरे का तबादला मुंबई हेड ऑफिस में और मार्केटिंग मैनेजर समीर गोखले को मुंबई से नागपुर ब्रांच में भेजा गया, एक एमएडीसी अधिकारी ने कहा कि ट्रांसफर रुटीन का हिस्सा है, उसने आगे कहा कि यह संभव है कि नए लोगों को नागपुर में हमारे फील्ड ऑफिस भेजा जाता है और अनुभवी मार्केटिंग मैनेजर को मुंबई हेड ऑफिस में. इन आरोपों से साफ है की, इस मामले को सरकार द्वारा पतंजलि को लाभ पहुंचाने की नजर से देखा जा रहा है.

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