कोविंद बने देश के14वें राष्ट्रपति, शपथ लेकर कहा- देश का हर नागरिक राष्ट्रनिर्माता

नई दिल्ली : रमानाथ कोविंद शपथ ग्रहण करके देश के 14वें राष्ट्रपति बन गए है. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने उन्हें शपथ दिलाई. कोविंद को 21 तोपों की सलामी दी गई. शपथ लेने से पहले कोविंद राजघाट पर पहुंचे थे जहा पर उन्होंने बापू को श्रद्धांजलि दी इसके बाद वो पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति भवन लेने पहुंचे थे. शपथ लेने के बाद राष्ट्रपति कोविंद ने संबोधित करते हुए कहा मुझे भारत के राष्ट्रपति पद का दायित्व सौंपने के लिएव् सभी का आभार. साथ ही उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी, सुमित्रा महाजन, प्रणब मुखर्जी सहित सभी का आभार जताया.

उन्होंने कहा मैं पूरी विनम्रता के साथ इस पद को ग्रहण कर रहा हूं. यहां सेंट्रल हॉल में आकर मेरी कई स्मृतियां ताजा हो गई हैं. मैं संसद सदस्य रहा हूं. इसी सेंट्रल हॉल में आपमें से कई लोगों के साथ विचार-विमर्श किया है. कई बार हम सहमत होते थे, कई बार असहमत. इसके बावजूद हमने एकदूसरे के विचारों का सम्मान करना सीखा. यही लोकतंत्र की खूबसूरती है." "मैं मिट्टी के घर में पला-बढ़ा हूं. हमारे देश की भी यही गाथा रही है. संविधान की प्रस्तावना में उल्लेखित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल तत्वों का पालन किया जाता है. मैं भी यही करूंगा.

125 करोड़ नागरिकों ने जो विश्वास जताया, उस पर खरा उतरने का वचन देता हूं. मैं डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. राधाकृण्ष्णन, डॉ. कलाम और प्रणब मुखर्जी जिन्हें हम प्रणब दा कहते हैं, उनके पदचिह्नों पर चलने जा रहा हूं." "गांधीजी ने हमें मार्ग दिखाया. सरदार पटेल ने हमारे देश का एकीकरण किया. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने हम सभी में मानवीय गरिमा और गणतांत्रिक मूल्यों का संचार किया. वे राजनीतिक स्वतंत्रता से संतुष्ट नहीं थे. वे करोड़ों लोगों की आर्थिक स्वतंत्रता का लक्ष्य चाहते थे.

हम 21वीं सदी के दूसरे दशक में हैं. हमें भरोसा है कि ये भारत की सदी होगी. हमें एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो आर्थिक नेतृत्व देने के साथ ही नैतिक आदर्श भी प्रस्तुत करे." "विविधता ही हमारा वो आधार है जो हमें विशेष बनाता है. हम बहुत अलग हैं, फिर भी एक हैं और एक रहेंगे. 21वीं सदी का भारत औद्योगिक क्रांति को भी विस्तार देगा. हमें अपनी परंपरा और प्रौद्योगिकी को प्राचीन भारत के ज्ञान और समकालिन विज्ञान के साथ लेकर चलना है.

डिजिटल राष्ट्र हमें विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास करेगा." देश का हर नागरिक राष्ट्रनिर्माता कोविंद ने कहा, "राष्ट्र निर्माण अकेले सरकारों द्वारा नहीं किया जा सकता. सरकार सहायक हो सकती है. वह समाज के उद्यमियों को नई दिशा दिखा सकती है. राष्ट्रीय गौरव ही राष्ट्र निर्माण का आधार है. हमें भारत की मिट्टी और पानी पर गर्व है. हमें भारत की संस्कृति-परंपरा-अध्यात्म पर गर्व है. हमें गर्व है अपने कर्तव्यों के निवर्हन पर. " "देश का हर नागरिक राष्ट्र निर्माता है.

प्रत्येक भारतीय मूल्यों का संरक्षक है. देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सशस्त्र बल राष्ट्र निर्माता है. पुलिस और अर्द्धसैनिक बल जो आतंकवाद से लड़ रहे हैं, वे राष्ट्र निर्माता है. जो किसान तपती धूप में अन्न उगा रहा है, वो राष्ट्र निर्माता है. खेत में न जाने कितनी महिलाएं भी काम करती हैं. जो भारत को मंगल तक ले जा रहा है, या किसी वैक्सीन का आविष्कार कर रहा है, वो राष्ट्र निर्माता है. जिस नौजवान ने अपना स्टार्टअप शुरू किया है और खुद रोजगारदाता बन गया है, वो राष्ट्र निर्माता है."

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