कर्नाटक सरकार ने यूजी पाठ्यक्रमों के लिए कन्नड़ भाषा को अनिवार्य करने से इंकार किया

 

बेंगलुरू: कर्नाटक सरकार ने स्नातक छात्रों के लिए कन्नड़ को अनिवार्य भाषा बनाने के अपने फैसले को उलट दिया है।

नए आदेश के अनुसार, जो छात्र स्थानीय भाषा का अध्ययन नहीं करना चाहते हैं, उन्हें उच्च न्यायालय के अगले आदेश तक ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। इस मामले में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के आलोक में यह फैसला किया गया है। आदेश के अनुसार, जिन छात्रों ने पहले ही पाठ्यक्रम में दाखिला ले लिया है, उनके पास कन्नड़ के अलावा किसी अन्य भाषा में अध्ययन करने का विकल्प होगा। उपस्थिति को नई भाषा के अनुसार समायोजित किया जाएगा।

21 जनवरी का सर्कुलर, सभी विश्वविद्यालय के उपाध्यक्षों और रजिस्ट्रारों, सार्वजनिक और निजी को संबोधित है। साथ ही इस संबंध में सहायता प्राप्त एवं गैर सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है।

7 अगस्त, 2021 को, राज्य सरकार ने राज्य में स्नातक डिग्री हासिल करने वाले छात्रों के लिए कन्नड़ सीखना अनिवार्य कर दिया। सरकार ने कहा कि यह आदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन (एनईपी) के अनुरूप है। सरकार ने अनिवार्य किया है कि जो छात्र स्कूल में कन्नड़ के संपर्क में नहीं आए हैं, वे एक सेमेस्टर कार्यात्मक कन्नड़ का अध्ययन करते हैं।

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