हैप्पी होली : आई रे आई होली...रंग और गुलाल में छिपा ढ़ेर सारा प्यार

Holi Festival : भारत पहले से ही कला और संस्कृति के क्षेत्र में अग्रणी रहा हैं अगर भारतीय समाज के त्यौहार की बात की जाए तो हमारे देश मे हर एक प्रसंग के लिए अलग त्यौहार है। भारतवर्ष त्यौहारों, कला, संस्कृति और सभ्यता से ओत- प्रोत है। हर एक त्यौहार का अपना विशेष महत्व होता है। इन सारे त्यौहारों में से एक होली जो दोस्त, यार, परिवार और सभी अपने के दिलों में प्यार का रंग भर देता है। यह त्यौहार खुशियों का, बुराई पर अच्छाई की विजय का, पुराने गिले-शिकवे भुला कर एक दूसरे के रंग में रंग जाने का त्यौहार है होली। 

होली रंगों का एक शानदार उत्सव है जो भारत में हिन्दु धर्म के लोग हर साल बड़ी धूमधाम से मनाते है। ये पर्व हर साल वसंत ऋतु के समय फागुन (मार्च) के महीने में आता है जो दिवाली की तरह सबसे ज्यादा खुशी देने वाला त्योहार है। ये हर साल चैत्र महीने के पहले दिन मनाया जाता है। इस दौरान पूरी प्रकृति और वातावरण बेहद सुंदर और रंगीन नजर आते है।

होली का ये उत्सव फागुन के अंतिम दिन होलिका दहन की शाम से शुरु होता है और अगला दिन रंगों में सराबोर होने के लिये होता है। बच्चे इस पर्व का बड़े उत्सुकता के साथ इंतजार करते है तथा आने से पहले ही रंग, पिचकारी, और गुब्बारे आदि की तैयारी में लग जाते है साथ ही सड़क के चौराहे पर लकड़ी, घास, और गोबर के ढ़ेर को जलाकर होलिका दहन करते है।

आस-पास के सभी लोग रात में एक जगह जुट कर लकड़ी, घास, और गोबर के ढ़ेर को जलाकर होलिका दहन के रिवाज को संपन्न करते है। इसमें महिलाऐं गीत भी गाती है। होली खेलने के लिये अगली सुबह का इंतजार करते है। इस दिन सभी लोग सामाजिक विभेद को भुलाकर एक-दूसरे पर रंगों की बौछार करते है साथ ही स्वादिष्ट पकवानों और मिठाईयाँ बाँटकर अपनी खुशी जाहिर करते है।

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