झारखण्ड में बिजली की दरें लगाएंगी करंट

रांची: झारखण्ड के सभी जिलों में 1 मई से बिजली की दरें बढ़ने वाली हैं, राज्य विद्युत नियामक आयोग ने शुक्रवार को इसकी मंजूरी दी है. इसका सबसे ज्यादा भार घरेलू श्रेणी के शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. घरेलू शहरी उपभोक्ताओं को वर्तमान में 200 यूनिट तक के लिए 2.90 रुपये प्रति यूनिट देने पड़ते हैं, नई दर के अनुसार अब घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 5.50 रुपये चुकाने होंगे. वहीं घरेलू ग्रामीण उपभोक्ताओं को अब 1.25 रुपये प्रति यूनिट की जगह 4.40 से 4.75 रुपये प्रति यूनिट चुकाने होंगे.

हालांकि बताया जा रहा है कि सरकार ने बिजली की बढ़ते दामों में रहत देने के लिए इसमें सब्सिडी का प्रावधान भी जोड़ा है, लेकिन सब्सिडी के प्रावधान, तौर-तरीके समेत उससे संबंधित शिकायत की प्रणाली को लेकर आयोग स्वयं स्पष्ट नहीं है. आयोग के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद और सदस्य (तकनीक) आरएन सिंह ने बताया कि सरकार ने सब्सिडी के लिए 2000 करोड़ रु का प्रावधान किया है. यहाँ एक आश्चर्यजनक तथ्य यह भी है कि घरेलू श्रेणी की बिजली की कीमत उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली बिजली के लगभग बराबर हो जाएगी, झारखण्ड के शहरों और गांवों में दो से तीन गुनी तक बिजली महंगी करने की तैयारी है, दरों में बढ़ोतरी का आधार यह है कि लोगों को गुणवत्तापूर्ण बिजली मुहैया कराई जाएगी, लेकिन, हकीकत उलट है. 

राजधानी रांची में मेंटेनेंस और अंडर ग्राउंड केबलिंग के नाम पर घंटों बिजली काटी जा रही है, लोड शेडिंग से भी पावर कट किया जा रहा है. औसतन रांची में पांच से छह घंटे बिजली कट रही है. गांवों और दूसरे शहरों का तो हाल और बुरा है, ज्यादातर जिलों में दस से बारह घंटे तक बिजली की कटौती हो रही है. दो दिनों पूर्व रांची में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बिजली कटौती के लिए रांची के लोगों से माफी मांगते हुए कहा कि दो-तीन महीनों का समय दें, रांची में 24 घंटे बिजली मिलने लगेगी, हालांकि यह वादा पूरा होता नहीं दिख रहा है. 

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