दिल्ली चुनाव : चुनावी घमासान के चलते जानिए दिल्ली के ई-रिक्शा चालकों का रुझान

नई दिल्ली: विधान सभा के चुनाव के आते ही कई अटकले लगाए जा रहे है. चलिए आज हम आपको दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों के ई-रिक्शा चालकों से उनका रुझान जानने की कोशिश करेंगे. हम सभी जानते है कि दिल्ली में अब मेट्रो आवागमन का मुख्य माध्यम बन चुका है. यदि आपको पास में ही कहीं जाना है तो ऑटो, कैब, ई रिक्शा या साइकिल रिक्शा का ही इस्तेमाल करते हैं. तो आज इन चालकों की राय जानने की कोशिश करेंगे. इस बात का पता लगाएंगे कि आखिर किस सरकार ने चालकों को प्रभावित किया हैं.

हमने इसकी शुरुआत कनॉट प्लेस से की. यहाँ एक ड्राइवर से हमने पूछा कि आपको क्या लगता है कि बीते सालो में कुछ सुधार हुआ है या नहीं तो ड्राइवर ने यह कहा कि ऐसा कुछ खास नहीं पर कुछ कार्य सरकार ने अच्छे किए है. स्कूलों में पढ़ाई पहले की तुलना में बेहतर है. और यदि हमारे बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलेगी तो उनका भविष्य संवर जाएगा इसी के साथ ड्राइवर ने यह भी कहा कि अस्पतालों की हालत में भी थोड़ा सुधार आया हैं. बस हमारी यही आशा हैं कि गरीबों को सरकारी अस्पताल में अच्छा इलाज मिल जाए. इससे अधिक और कुछ नहीं चाहिए. कुछ लोग मोदी के तो कुछ केजरीवाल के पक्ष में नजर आये इसके बाद जब हमने दो और रिक्शा चालको से बात कि तो उन्होंने केजरीवाल सरकार की प्रसंशा करते कहा कि पहले हमारे क्षेत्र में बिजली-पानी फ्री नहीं हैं. बिजली के 350 और पानी के 250 रुपए देते हैं, लेकिन केजरीवाल ठीक इंसान लगते हैं. इन दोनों चालकों के बीच मोदी और केजरीवाल को लेकर बहस शुरू हो जाती है. कुछ का मानना हैं की केजरीवाल तो हमारे लिए हीरो हैं. उनके कारण से ही मेरा यह रिक्शा चल रहा है. केजरीवाल गरीबों और आम लोगों के साथ खड़े रहते हैं. पहले हम बिजली-पानी का जो पैसा देते थे. आज उसका 10 फीसदी ही लगता है.

लेकिन कुछ लोगो ने केजरीवाल के सभी वायदे को गिनाते हुए कहा की वो धरातल में हार चुके हैं. कुछ ने केजरीवाल की तारीफ करते कहा कि “ऑटो का फिटनेस टेस्ट पहले हर साल होता था. हर बार 4 से 6 हजार लगते थे. अब दो साल में होता है वही इसमें सिर्फ 400 से 600 रुपए लगते हैं. मेरी गाड़ी से एक बंदे का एक्सीडेंट हुआ. इसने इलाज में लाखों रुपए लगे, जो सारे पैसा केजरीवाल ने दिया. वही कुछ चालकों में मोदी सरकार के कई कदम की खुद तारीफ की और मोदी पक्ष में नजर आये.कई चालकों ने यह भी बताया की शाहीन बाग़ में आंदोलन के चलते कई तरह की परेशानियों को हमें झेलना पड़ा रहा हैं. वे बार-बार चालान कटने से परेशान और नाराज हैं. देखा जाये तो दोनों ही सरकार का मिलाजुला रूप देखने को मिल रहा हैं. कुछ मोदी सरकार के पक्ष में तो कुछ केजरीवाल के पक्ष में नजर आ रहे हैं. अब यह तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा की कौन विजय को प्राप्त करता हैं.

चूरू में 10 वर्षीय मासूम से दुष्कर्म, रेप के बाद दरिंदे ने पत्थर से कुचला सिर

सिंगर-म्यूजिक कंपोजर मीत ब्रदर्स के पिता का हुआ निधन, आज होगा अंतिम संस्कार

अयोध्या: राम मंदिर के लिए हुआ ट्रस्ट का गठन, मोदी सरकार ने दिया पहला चंदा

Related News