'इजराइल से हमला रोकने को कहें, क्योंकि इस्लाम और यहूदी..', पीएम मोदी और UN से अजमेर दरगाह के प्रमुख की अपील

अजमेर: राजस्थान की अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख, हज़रत दीवान सैयद ज़ैनुल आबेदीन ने गुरुवार (12 अक्टूबर) को संयुक्त राष्ट्र (UN) और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने और गाजा में चल रहे इजरायली सैन्य अभियानों पर रोक लगाने का आग्रह किया। बता दें कि, आतंकवादी समूह हमास द्वारा इजराइल पर किए गए घातक आतंकवादी हमलों में 1,300 से अधिक लोग मारे गए थे और 3,300 से अधिक घायल हो गए थे।

इतिहास के सबसे भयानक आतंकी हमले के बाद इजराइल ने जवाबी कार्रवाई शुरू की है। इजराइली कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, आबेदीन ने कहा कि हत्याएं अनुचित थीं और इस्लाम और यहूदी धर्म के उपदेशों के अनुरूप नहीं हैं। एक बयान में अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख के हवाले से कहा गया कि, 'मैं संयुक्त राष्ट्र और भारत सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने और इज़राइल और फिलिस्तीन में शत्रुता को रोकने की अपील करता हूं। निर्दोष लोगों की जान का नुकसान अनुचित और अत्यधिक निंदनीय है। यह इस्लाम और यहूदी धर्म दोनों की शिक्षाओं के खिलाफ है।'

उन्होंने कहा कि, 'मैं दोनों पक्षों से हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि वे अपने-अपने धर्म और मानवता की खातिर इस रक्तपात को रोकें। प्रत्येक धर्म को किसी भी रूप में हिंसा से घृणा करनी चाहिए। इस्लाम में निर्दोष लोगों की जान लेना सख्त वर्जित है। निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए यह युद्ध अवश्य रुकना चाहिए।'' सैयद ज़ैनुल आबेदीन ने पीएम मोदी की बात दोहराते हुए कहा कि, ''यह युद्ध का युग नहीं है। शांतिपूर्ण बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। यह इस बारे में नहीं है कि कौन जीता या हारा। यह मानवता को नष्ट होने से बचाने के लिए एक-दूसरे के अधिकारों और सीमाओं का सम्मान करने के बारे में है। जबकि मुसलमान होने के नाते, हम मुसलमानों के जीवन की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं, हमें यह भी याद रखना चाहिए, चाहे मुसलमान हो या नहीं, मानव जीवन अल्लाह को बहुत प्रिय है और कई हत्याएं हमें अल्लाह का अनुग्रह नहीं देंगी।'

''फिलिस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों'' के समर्थन में सामने आते हुए उन्होंने कहा कि, 'एक मुसलमान होने के नाते मैं फिलिस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों के साथ खड़ा हूं, लेकिन उन लोगों के साथ नहीं जो अपने हाथों में बंदूकें लेते हैं और निर्दोष लोगों को मारते हैं। समुदाय को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए और ज़मीन पर शांति बनाए रखनी चाहिए।'' इस बीच, जैसे ही आतंकी संगठन हमास के खिलाफ इजरायल का जवाबी हमला सातवें दिन में प्रवेश कर गया, इजरायली वायु सेना ने कहा कि उसके लड़ाकू विमानों ने हमास के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया और आतंकवादी संगठन की सैन्य चौकियों को नष्ट कर दिया।

गाजा में फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि इजरायली बलों के जवाबी हवाई हमलों में अब तक कम से कम 1,537 फिलिस्तीनी मारे गए हैं और 6,612 अन्य घायल हुए हैं। रामल्ला में फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में हवाई हमले में कम से कम 36 लोग मारे गए हैं और 650 से अधिक घायल हुए हैं। बता दें कि, ईरान, लेबनान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों ने इजराइल पर हमला कर युद्ध भड़काने वाले फिलिस्तीन और हमास का समर्थन किया है। वहीं, भारत में भी कांग्रेस सौर AIMIM ने फिलिस्तीन का समर्थन किया है, यही नहीं हिजबुल्लाह, ISIS, बोको हरम, जैसे आतंकी संगठन भी हमास के समर्थन में उतर आए हैं, ऐसे में इजराइल पर चौतरफा हमले का ख़तरा मंडरा रहा है। जिस तरह पाकिस्तानी आतंकी अक्सर भारत पर हमले करते रहते हैं और फिर भारत जवाब देता है, उसी तरह हमास के आतंकी अक्सर इजराइल पर हमला करते रहते हैं। छोटे-मोटे हमलों को इजराइल का आयरन डोम नाकाम कर देता था, लेकिन इस बार हमास ने एक साथ 5000 रॉकेट इजराइल पर दागे थे, और आतंकियों ने एक म्यूजिक फेस्टिवल पर हमला कर 250 इजराइली को मार दिया था। यहाँ तक कि, आतंकियों ने महिलाओं की नग्न परेड कराई है, 40 बच्चों की गर्दन काटकर, जिन्दा जलाकर निर्मम हत्या की है, जिससे इजराइल आगबबूला है और उसने हमास को जड़ से मिटाने की कसम खा ली है, ऐसे में अब ये मुश्किल है कि, इजराइल हमास का खात्मा होने तक हमले रोकेगा। 

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