खुशियां मनाओ, मर गया लोकतंत्र ! तालिबानी आतंकियों के हाथ में सत्ता सौंप अफ़ग़ानिस्तान से भागे राष्ट्रपति

काबुल: आखिर लोकतंत्र का अंत हुआ और अफ़ग़ानिस्तान पर आतंकी संगठन तालिबान ने पूरी तरह कब्ज़ा कर लिया है। लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित अफगानिस्तान की सरकार के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने इस्तीफा दे दिया है और प्राप्त खबरों के मुताबिक, उन्होंने देश छोड़ दिया है। इसके साथ ही, 'लोकतंत्र बचाओ' और 'मानवाधिकार बचाओ' के नारे लगाने वालों की भी पोल खुल गई है। कुछ दिन पहले जो लोग, 'फिलिस्तीन बचाओ' का राग अलाप रहे थे, आज अफ़ग़ानिस्तान के नरसंहार पर मौन हैं, उलटा वे आतंकी संगठन तालिबान की जीत का जश्न मना रहे हैं।शायद इन लोगों को लोकतंत्र पसंद ही नहीं है, उन्हें पसंद है वही कबीलाई नेतृत्व, जिसमे एक व्यक्ति की हुकूमत चलती है और वो किसी के भी साथ, जो भी चाहे कर सकता है।

वहीं, इसी बीच खबर आ रही है कि अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सलेह ने अभी देश नहीं छोड़ा है, किन्तु माना जा रहा है कि वे भी जल्दी ही अफगानिस्तान से पलायन कर देंगे। शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण के साथ ही तालिबान ने काबुल को घेर कर खड़े संगठन के लड़ाकों को काबुल में दाखिल होने की अनुमति देे दी है। तालिबान को हस्तांतरित सत्ता में अली अहमद जलाली को प्रमुख बनाए जाने की खबर है। हालाँकि, ताजा जानकारी मिलने तक तालिबान ने सार्वजनिक भवनों पर अभी तक अपना झंडा नहीं फहराया है और ना ही देश का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का ऐलान किया है। खबर मिली है कि अमेरिका में रहने वाले शिक्षाविद और राजनयिक, अली अहमद जलाली को अंतरिम सरकार का चीफ बनाया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, जलाली के नाम पर अमेरिका, तालिबान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान सरकार के बीच आम सहमति बनी है।

कौन हैं अली अहमद जलाली ?

अली अहमद जलाली का जन्म काबुल में हुआ था, किन्तु 1987 से अमेरिकी नागरिक हैं और अमेरिका के मेरीलैंड में रहते थे। सन 2003 में तालिबान सरकार के पतन के बाद अफगानिस्तान वापस आए थे। उस समय बनी सरकार में उन्हें इंटीरियर मिनिस्टर यानी गृहमंत्री नियुक्त किया गया था। वे सितंबर 2005 तक इस पद पर बने रहे थे। जलाली जर्मनी में अफगानिस्तान के राजदूत की भूमिका भी निभा चुके हैं। 80 के दशक में जब अफगानिस्तान के मुजाहिदीनों का सोवियत संघ के साथ युद्ध चल रहा था तब जलाली सेना में कर्नल हुआ करते थे। उस वक़्त वे पाकिस्तान के पेशावर स्थित Afghan Resistance Headquarters में शीर्ष सलाहकार की भूमिका भी निभा रहे थे। इस तरह जलाली एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिनका अफगानिस्तान की मौजूदा सरकार, अमेरिका, पाकिस्तान और तालिबान सबके साथ अच्छे संबंध हैं। प्रोफेसर से लेकर राजदूत और सैन्य अधिकारी से लेकर गृहमंत्री तक की भूमिका में रह चुके जलाली के नाम पर इन चारों पक्षों ने मुहर लगा दी है।

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