महात्मा फुले की पुण्यतिथि आज, जानिए उनके जीवन से जुड़े 7 अहम् तथ्य

नई दिल्ली: आज देश के महान भारतीय विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक और क्रांतिकारी ज्‍योतिराव गोविंदराव फुले की पुण्यतिथि है. ज्‍योतिराव फुले को 'महात्मा फुले' और 'ज्‍योतिबा फुले' नाम से भी विख्यात है. 'महात्मा फुले' ने महिलाओं और दलितों के उत्थान के लिए के लिए कई कार्य किए थे. ज्‍योतिबा फुले भारतीय समाज में प्रचलित जाति पर आधारित विभाजन और पक्षपात के खिलाफ थे. महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को पुणे में हुआ था. उनकी माता का नाम चिमणाबाई और पिता का नाम गोविन्दराव था. उनका परिवार कई पीढ़ी पूर्व सतारा से पुणे आकर फूलों का कार्य करने लगा था, जिसके कारण उनकी पीढ़ी 'फुले' के नाम से पहचानी जाती थी. ज्‍योतिराव फुले की पुण्यतिथि के अवसर पर आज हम आपको उनके जीवन से जुड़ी 7 अहम् बातें बता रहे हैं...

1. ज्‍योतिराव का परिवार फूलों के गजरे बनाने का कार्य करता था. यही कारण था कि उनके परिवार को फुले के नाम से जाना जाता था. जब ज्‍योतिबा महज एक साल के थे तभी उनकी मां का देहांत हो गया था.

2. ज्‍योतिबा फुले ने कुछ वक़्त तक मराठी में पढ़ाई की, बीच में पढाई छूट गई और बाद में 21 वर्ष की उम्र में अंग्रेजी की सातवीं कक्षा की पढाई पूरी की.

3. महात्मा फुले का विवाह वर्ष 1840 में सावित्री बाई से हुआ था.  

4.  स्त्रियों की दशा सुधारने और समाज में उन्‍हें पहचान दिलाने के लिए उन्‍होंने 1854 में एक विद्यालय शुरू किया. यह देश का पहला ऐसा स्‍कूल था जिसे लड़कियों के लिए खोला गया था.  

5. ज्योतिबा ने ब्राह्मण-पुरोहित के बगैर ही विवाह-संस्कार शुरू करवाया और इसे मुंबई उच्च न्यायालय से भी मान्यता मिली. बाल-विवाह विरोधी और विधवा-विवाह के समर्थक थे.

6. उन्‍होंने दलितों के उत्थान के लिए कई कार्य किए. उन्होंने दलितों के बच्‍चों को अपने घर में पाला और उनके लिए पानी की टंकी भी खोल दी. जिसके परिणामस्वरूप उन्‍हें जाति से बहिष्‍कृत कर दिया गया.

7. महात्‍मा ज्‍योतिबा फुले ने 63 साल की उम्र में 28 नवंबर 1890 को पुणे में अपने प्राण त्‍याग दिए.

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