तो इस कारण मनाया जाता है रक्षाबंधन, भगवान श्री कृष्ण है ख़ास वजह

दो शब्दों रक्षा और बंधन से मिलकर बना रक्षाबंधन पर्व भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख त्यौहार है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है और बदले में भाई उन्हें किसी ख़ास तोहफे के साथ ही उनकी रक्षा का वचन भी देते हैं। कई लोगों के मन में यह सवाल भी होगा कि आख़िर रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है ? तो आइए आज हम आपके इस सवाल का जवाब आपको देते है। जानिए कि आख़िर रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है ?

असल में यह त्यौहार भाई-बहन के बीच के प्रेम को दर्शाने का काम करता है। भविष्य पुराण की एक कथा में बताया गया है कि इस धरती की रक्षा हेतु देवता और असुरों में 12 साल तक युद्ध चला था, हालांकि देवताओं को इसमें सफलता नहीं मिली। इसके पश्चात् देवगुरु बृहस्पति द्वारा इंद्र की पत्नी शची को सावन शुक्ल की पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर रक्षासूत्र बनाने के लिए कहा गया। फिर इसे उन्होंने इंद्र की दाहिनी कलाई में बांधा और तब जाकर असुरों को पराजित करने में देवता सफल साबित हुए। 

इस संबंध में एक कहानी यह भी है कि महाभारत के समय में भगवान श्री कृष्ण और द्रोपदी को भाई बहन माना गया है। पौराणिक मान्यताओं की माने तो शिशुपाल का वध करने के दौरान भगवान श्री कृष्ण की तर्जनी उंगली कट चुकी थी, इस दौरान बहन का दायित्वा निभाते हुए द्रोपदी ने श्री कृष्ण की उंगली पर अपनी साड़ी फाड़कर पट्टी बांधी थी और तब से श्रावण की पूर्णिमा को राखी के रूप में मनाया जाता है। 

 

 

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