दार्जिलिंग में GJM का उग्र प्रदर्शन, सेना को किया तैनात

दार्जिलिंग : इस समय देश के कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन जारी है .महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश राज्य किसान आंदोलन के कारण अशांत है, तो वहीं भाषा की राजनीति ने पश्चिम बंगाल में हिंसक रूप ले लिया है. ममता बनर्जी द्वारा बंगाल की स्कूलों में बंगाली पढ़ाए जाने को अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गया है. स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए सेना को तैनात किया गया है. उधर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ने आज 12 घंटे के बंद का आह्वान किया है. इस कारण दार्जिलिंग में हजारों सैलानी फंस गए हैं.

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के स्कूलों में बंगाली पढ़ाए जाने को अनिवार्य किए जाने और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दौरे के खिलाफ गोरखा जनमुक्ति मोर्चा पूरे पहाड़ी इलाके में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रही है. इसी प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े लेकिन स्थिति नियंत्रित न होते देख पश्चिम बंगाल सरकार ने सेना की मदद मांगी थी. राज्य सरकार की मांग पर केंद्र सरकार ने सेना की दो टुकड़ियां भेजी हैं. दार्जिलिंग वाले इलाके की महत्ता को दर्शाने के लिए ममता बनर्जी ने पहली बार यहां कैबिनेट बैठक की है. इसके बाद से जीजेएम का विरोध प्रदर्शन और बढ़ गया है.

बता दें कि ममता बनर्जी के यहां आने के बाद हजारों लोग सड़कों पर उतर आए. 'जय गोरखा' के नारे के साथ हजारों जीजेएम समर्थक दार्जिलिंग की सड़कों पर काले झंडों के साथ गोरखालैंड की मांग कर रहे हैं.गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के संस्थापक बिमल गुरंग ने कहा कि सड़कों पर उतरे लोग अपनी भाषा को बचाना चाहते हैं.गुरंग के अनुसार ममता बनर्जी ने दावा किया था कि बंगाली पढ़ना अनिवार्य नहीं, बल्कि वैकल्पिक होगी. उन्होंने ममता बनर्जी से विधानसभा में बिल पास कर नेपाली भाषा को पूरी सुरक्षा देने की मांग की है .

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