'हमास के मुजाहिदों पर फख्र है, उन्होंने दिखा दिया कि..', कांग्रेस नेता असगर अली का बयान, आतंकी हमले पर पार्टी भी रही है मौन !

लेह: दिल्ली में बैठे अपने हाईकमान की तर्ज पर, लद्दाख कांग्रेस के कार्यकारी कार्यकारी अध्यक्ष असगर अली करबलाई ने फिलिस्तीनियों और उनके आतंकवादी संगठन हमास के प्रति अपने अटूट समर्थन का ऐलान किया है, जिसने बीते दिनों (7 अक्टूबर को) इजरायल पर अब तक का सबसे घातक हमला किया है। आतंकी संगठन हमास के इस हमले में 1000 से अधिक इजराइली नागरिक मारे गए हैं। 

बता दें कि हमास इजरायली नागरिकों पर अकथनीय हिंसक अपराध कर रहा है, जिसमें क्रूर हत्याएं, बच्चों का सिर काटना, बलात्कार, अपहरण और बंधक बनाना शामिल है, इसके बावजूद एक वीडियो में कांग्रेस नेता असगर अली को हमास आतंकवादियों की प्रशंसा करते हुए सुना जा सकता है। यही नहीं, असगर हमास द्वारा किये जा रहे अत्याचारों को उचित ठहरा रहे हैं। उन्हें इज़राइल के खिलाफ हमले करने के लिए गाजा से 'हमास मुजाहिदीन' की सराहना करते हुए सुना जा सकता है, जिसे (इजराइल को) वह 'सबसे बड़े शैतानों' - संयुक्त राज्य अमेरिका का गुलाम कह रहे हैं।  

 

करबलाई ने प्रदर्शन के दौरान एक मीडिया चैनल Times Now से बात करते हुए इजरायल पर हमास के आतंकी हमले को जायज ठहराया, जिसमें बच्चों का कत्लेआम और महिलाओं का बलात्कार किया गया। कांग्रेस नेता ने कहा कि, “गाजा में मौजूद हमास के मुजाहीदीन ने जिस प्रकार से सबसे बड़े शैतान और सबसे बड़े दहशतगर्द अमेरिका और उसके पाले हुए इजरायल पर इन्होंने (हमास ने) अपनी ही जमीन को वापस लेने का आगाज़ किया। सरजमीं-ए-गाजा की जमीन 3 बराबर अपने इलाके को वापस ले आया और उन्हें फिलिस्तीन में मिला दिया गया।'

आतंकी संगठन हमास का महिमामंडन करते हुए असगर अली करबलाई ने कहा कि, 'इस दौरान सैकड़ों इजरायली फौजियों को ना केवल कैदी बना लिया गया, सैकड़ों को मार डाला गया। उन्होंने एक बार दिखला दिया कि आप कितना भी दबा दें, फिलिस्तीन के मुजाहिद, गाजा के मुजाहिद, कभी भी सरजमीं-ए-फिलिस्तीन से अपना हाथ उठाने वाले नहीं हैं। ना केवल गाजा की, ना केवल फिलिस्तीन की, बल्कि बैतूल मुकद्दस (टेम्पल ऑफ़ सोलोमन) की आजादी तक इसी प्रकार लड़ते रहेंगे।'

इजरायल के अस्तित्व को ही खारिज करते हुए असगर अली ने कहा कि, 'इजरायल का जो बना-बनाया वजूद है, इसकी कोई हैसियत ही नहीं है। ये मकड़ी के जाले से भी अधिक कमजोर है और उन्होंने (हमास ने) इसे 7 अक्टूबर को उसकी हैसियत दिखला दी। मुजाहीदीन से लड़ने की ताकत इनके (इजराइल के) फौजियों में नहीं है। इजरायल वाले अपने आप को दुनिया को चौथी एडवांस सेना मानते हैं, लेकिन निहत्थे फिलिस्तीनियों के सामने उनकी ताकत धरी की धरी रह गई है।'

खुद को हमास का साथ देने पर फख्र महसूस कर रहे कांग्रेस नेता असगर ने आगे कहा कि, 'इजराइल सोचता है कि फिलिस्तीन पर बमबारी करके वह हमास और हमास के मुजाहिदों को झुकने पर मजबूर कर देगा। लेकिन, उसी मलबे से उठा हुआ दो वर्ष का बच्चा, शहीद की माँ, शहीद का बाप, शहीद का भाई जीत का निशाना दिखाते हुए उठ खड़ा होते हैं और इजरायल के सफाए का पैगाम देते हैं। हम फख्र से कहते हैं कि हम हमास के मुजाहिद के साथ खड़े हैं।'   हालाँकि यह सच है कि 7 अक्टूबर को हमास आतंकवादियों द्वारा शुरू किए गए युद्ध में दोनों पक्षों के कई नागरिक शिकार हुए हैं, इंटरनेट पर ऐसे कई वीडियो और चित्र उपलब्ध हैं जो इस्लामवादी आतंक के सदस्यों की क्रूरता और बर्बरता की सीमा को दर्शाते हैं। हमास संगठन ने पिछले 5 दिनों में इजरायली नागरिकों और रक्षा कर्मियों पर हमले किए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए कई परेशान करने वाले दृश्य वास्तव में इस बात का सबूत हैं कि हमास के आतंकवादियों ने महिलाओं, बुजुर्गों और नवजात शिशुओं सहित 1300 से अधिक निर्दोष इजरायली लोगों की गोली मारकर, चाकू मारकर, सिर काटकर और यहां तक कि उन्हें जिंदा जलाकर हत्या कर दी है।

वास्तव में, गुरुवार, 12 अक्टूबर को, इज़राइल में प्रधान मंत्री कार्यालय ने पत्रकारों और जनता के लिए मारे गए शिशुओं की भयानक तस्वीरें जारी करने का असाधारण कदम उठाया, जिसका उद्देश्य शनिवार को दक्षिणी इज़राइल में हमास द्वारा किए गए क्रूर उत्पात को रेखांकित करना था। 

फ़िलिस्तीनियों के समर्थन में कांग्रेस, इजराइल पर हुए हमले का जिक्र नही:-

बता दें कि लद्दाख कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष असगर अली करबलाई के विचार उनकी पार्टी के हाईकमान और गांधी परिवार के साथ मेल खाते हैं, जिन्होंने फिलिस्तीनियों के प्रति अपने एकतरफा समर्थन का ऐलान किया था और इजराइल पर हुए आतंकी हमले का जिक्र तक नहीं किया था। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) द्वारा 9 अक्टूबर (आतंकी हमले के दो दिन बाद) को पारित एक प्रस्ताव में स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई और युद्धविराम का आग्रह किया गया। हालाँकि प्रस्ताव ने फ़िलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का समर्थन किया। कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक बयान में इज़राइल और फिलिस्तीन के बीच समस्या को हल करने के लिए "बातचीत और संवाद" की प्रक्रिया पर जोर दिया गया।

 

कांग्रेस ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का हमेशा मानना रहा है कि आत्म-सम्मान, समानता और गरिमा के जीवन के लिए फिलिस्तीनी लोगों की वैध आकांक्षाएं केवल बातचीत और आपसी संवाद की प्रक्रिया के माध्यम से पूरी होनी चाहिए, जबकि इजरायली लोगों के वैध राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को सुनिश्चित करना चाहिए। किसी भी प्रकार की हिंसा कभी भी समाधान नहीं देती है और इसे रुकना चाहिए।'' हालाँकि, कांग्रेस ने अपने प्रस्ताव में कहीं भी इजराइल पर हुए हमले का जिक्र नहीं किया है। इससे पहले 9 अक्टूबर को सुबह कांग्रेस ने जयराम रमेश की तस्वीर के साथ एक बयान जारी किया था, जिसमे पार्टी ने इजराइल पर हुए हमले की निंदा भर कर दी थी। हालाँकि, पार्टी ने हमले को 'आतंकी हमला' कहने से परहेज किया था, लेकिन इसके बावजूद पार्टी के मुस्लिम समर्थक नाराज़ हो गए थे और उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कांग्रेस को वोट न देने की धमकी दे दी थी। जिसके बाद शाम को कांग्रेस ने यू-टर्न लेते हुए अपनी कार्य समिति (CWC) की बैठक में एकतरफा फिलिस्तीन के समर्थन में प्रस्ताव पारित कर दिया, तब जाकर पार्टी का विरोध रुका। 

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