महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार करने में उर्जित पटेल का है अहम योगदान

मुंबई। भारतीय रिज़र्व बैंक को रघुराम राजन के बाद किसी दक्ष और निपुण अधिकारी की आवश्यकता थी जो कि, आर्थिक लिहाज से कठिन दौर से निकल रहे सार्वजनिक बैंक्स को रेग्युलेट कर सके साथ ही ऐसी नीतियों का निर्माण करे, जिससे देश की आर्थिक व्यवस्था वैश्विक परिदृश्य में भी सुदृढ़ रहे। ऐसे में डाॅ. उर्जित पटेल को कमान सौंपी गई और उनहें रिज़र्व बैंक का गर्वनर बनाया गया।

उन्होंने अपनी नीतियों से न केवल भारत के बैंकिंग सेक्टर को मजबूती प्रदान की बल्कि ब्रिक्स देशों के साथ अंतर - सरकारी समझौते व अंतर केंद्रीय बैंक समझौते में प्रमुख दायित्व निभाया। उर्जित पटेल का जन्म 28 अक्टूबर 1963 को हुआ था। वे वर्ष 2016 को भारतीय रिज़र्व बैंक के गर्वनर नियुक्त किए गए। हालांकि वे आरबीआई के उपगवर्नर पद पर भी रहे थे।

अपने शैक्षणिक जीवन में उन्होंने लंदन स्कूल आॅफ इकोनाॅमिक्स में स्नातक उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन किया और फिर वर्ष 1986 में एमफिल की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने आईएमएफ इंडिया डेस्क से 1991 से 94 के बीच डाॅक्टरेट उपाधि प्राप्त की। उन्होंने इंटरनेशन माॅनिटरी फंड के तहत वर्ष 1990 में भारत के लिए यूएसए में कार्य किया।

11 जनवरी वर्ष 2013 में वे आरबीआई के डिप्टी गवर्नर बने। उनके नेतृत्व में आरबीआई ने बेहतर कार्य किया। वे भारत के लिए बेहद आर्थिक प्रावधान सृजित कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में आरबीआई बैंकिंग और वित्तीय प्रबंधन करने में अपना बेहतर योगदान दे रहा है।

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