आइये इस जन्माष्टमी जाने श्री कृष्ण से जुडी कुछ खास बातें

कृष्ण नाम ही स्वतः भावनाओं का पुंज से प्रकाशमान होकर सदैव ही हमें प्रकाषित करता रहा है.  कृष्ण में कहीं नटखट बचपन छुपा है, तो कहीं दोस्ती का अद्भुत स्वरुप दिख रहा है. कृष्ण के कई स्वरुप है, जिसमे अनगिनत रहस्य छुपे है. ज्ञान की सर्वोत्तम परिभाषा के रुप में परिभाषित किया जा सकता है, उनको. क्षमा करने की कला अगर सीखनी है, तो सीखो श्री कृष्ण से. शालीनता से संवाद की कला सीखनी है, तो ये भी हमें श्री कृष्ण से ही सीखनी पड़ेगी.

जिनके जन्म से पहले ही उनकी मृत्यु निश्चित कर दी गई, एैसे नायक है श्री कृष्ण. नटवरनागर श्री कृष्ण उस संर्पूणता के परिचायक हैं जिसमें मनुष्य, देवता, योगीराज तथा संत आदि सभी के गुणं समाहित है. समस्त शक्तियों के अधिपति युवा कृष्ण महाभारत में कर्म पर ही विश्वास करते हैं. कृष्ण का मानवीय रूप महाभारत काल में स्पष्ट दिखाई देता है. गोकुल का ग्वाला, बिरज का कान्हा धर्म की रक्षा के लिए रिश्तों के मायाजाल से दूर मोह-माया के बंधनों से अलग है।                                                 श्रीकृष्ण जिनका नाम है, गोकुल जिनका धाम है!                                                        ऐसे श्री भगवान को,   बारम्बार प्रणाम है।”

आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार करने वाले अर्जुन के सखा भी तो और गुरु भी थे. युद्व के लिए व्याकुल दुर्योधन को समझाने जाने वाले भी श्री कृष्ण थे , तो अर्जुन को युद्व को प्रेरित करने वाले भी श्री कृष्ण थे. अर्जुन के मन- मस्तिष्क से मोह- माया की परत को निकालकर निराकार आत्मा के अस्तिस्व को बताने वाले भी श्री कृष्ण थे. गीता के उपदेष को श्री मुख से सुनकर अर्जुन को स्वतः ही मोक्ष का ज्ञान मिला .

गीता का उपदेष आज भी हमारे सनातन धर्म का अभिन्न अंग है. इसी ज्ञान परंपरा पर हमारा जीवन कृष्णमय हो रहा है. हिन्दू धर्म में गीता की महत्ता सर्वोपरि है. गीता में व्यक्त कर्मो की अधिकारिता सर्वत्र ब्याप्त है. एक एैसी पवित्र पुस्तक जो हमें जीवन के सभी रहस्यों के बारे में अवगत कराती है, साथ जीवन-मरण की कोख से मोक्ष की अमरता का रहस्य से अवगत कराती है.                                                           सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज ।                                                          अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामिमाशुचः ।।66।।   सम्पूर्ण धर्मों को अर्थात् सम्पूर्ण कर्तव्य कर्मों को मुझमें त्याग कर तू केवल एक मुझ सर्वशक्तिमान, सर्वाधार परमेश्वर की ही शरण में आ जा. मैं तुझे सम्पूर्ण पापों से मुक्त कर दूँगा, तू शोक मत कर.

पुराणों के मान्यता के अनुसार द्वापर के अन्तिम चरण में  भगवान श्री कृष्ण ने भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अवतार लिया था. इसके बाद से इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा. इस त्योहार को भारत में हीं नहीं बल्कि विदेश में भी हिंदू संप्रदाय के लोग पूरी आस्था के साथ मनाते हैं. भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आधी रात में अत्याचारी मामा कंस के विनाश के लिए भगवान श्री कृष्ण ने मथुरा में अवतार लिया था. इसलिए इस दिन मथुरा में काफी हर्षोउल्लास से जन्माष्टमी मनाई जाती है. दूर-दूर से लोग इस दिन मथुरा आते हैं.

इस दिन मथुरा नगरी पूरे धार्मिक रंग में रंगी होती है. इस दिन भगवान श्री कृष्ण के मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है, और झांकियां सजाई जाती हैं. आज के दिन श्री कृष्ण के बाल रूप , यानि लड्डू गोपाल नहलाकर नए कपडे पहनाये जाते है और माखन का भोग लगाया जाता है. जैसा की हम जानते है श्री कृष्ण का जन्म आधी रात में हुआ था. तो उसी तरह आज रात 12  बजे भी कृष्ण जन्म उत्सव मनाया जाएगा , जिसमे रात 12 बजे बाल गोपाल को झूले में बैठकर झुलाया जाएगा. और गीत आये जायेंगे. 

भगवान श्रीकृष्ण की महिमा

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