तेल की कीमतें पाताल में, लेकिन ईंधन स्टोर करने वाले टैंकरों के भाड़े आसमान पर

नई दिल्ली: पूरी दुनिया में ईंधन की खपत को कोरोना वायरस और लॉकडाउन ने बेहद कम कर दिया है. वहीं तेल की स्टोरेज की आवशयकता ने टैंकर भाड़े को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. उद्योग के डेटा ऐसा ही दर्शा रहे हैं. समुद्री तटों के किनारे स्टोरेज की सुविधाओं की भरमार हैं. वहीं सप्लाई चेन्स में कतार में लगा तेल ज्यादा मात्रा में है. तेल उत्पादक देश, कारोबारी और रिफाइनरियां इस उम्मीद में पानी में तैर रहे जहाजों में अधिक से अधिक तेल भरे जा रही हैं कि भविष्य में भारी मांग की स्थिति से निपटा जा सकेगा.

उल्लेखनीय है कि तेल की वैश्विक मांग इस तिमाही में 30 फीसद तक कम हो गई, क्योंकि दुनिया भर में कोरोना के कारण लागू हुए लॉकडाउन्स ने जमीनी अर्थव्यवस्था को थाम कर रखा दिया. यदि यही स्थिति जारी रहती है, तो मई 2020 तक ओक्लाहोमा और दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया में अमेरिकी क्षमताएं पूरी तरह भर चुकी होंगी. इस हालात ने उत्पादकों और व्यापारियों को कम से कम, फिलहाल के लिए तेल टैंकरों को फ्लोटिंग स्टोरेज यूनिट्स के लिए किराए पर देने को बाध्य कर दिया है.

इससे क्रूड आयल को ले जाने वाले बहुत बड़े कैरियर्स या VLCCs के दैनिक भाड़े में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. अब ये एक दिन का भाड़ा औसतन 240,000 अमेरिकी डॉलर वसूला जा रहा है. दो महीने पहले ये भाड़ा महज 25,000 अमेरिकी डॉलर हुआ करता था. इस घटनाक्रम ने तेल-टैंकर के शेयरों में बड़े पैमाने पर इजाफा किया है. बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, तेल टैंकर्स से संबंधित लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए भारी मुनाफा कमाने वाला समय चल रहा है.

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